प्याज से भरे ट्रक में छिपकर जा रहे श्रमिकों को पुलिस ने पकड़ा, महिला-बच्चे भी शामिल

प्याज से भरे ट्रक में छिपकर जा रहे श्रमिकों को पुलिस ने पकड़ा, महिला-बच्चे भी शामिल

ग्वालियर।अतुल सक्सेना।

लॉक डाउन में चोरी छिपे एक जिले से दूसरे जिले में जाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। सीमाएं सील होने के बाद लोग ट्रकों में छिपकर एक जगह से दूसरी जगह जा आरहे हैं। पुलिस ने ऐसे ही 23 लोगों को पकड़ा है जो प्याज से भरे ट्रक में चिपकर ग्वालियर से निकल रहे थे। पकड़े गए लोग श्रमिक वर्ग के हैं और इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

ग्वालियर शहर के अंदर कोरोना संक्रमण को काबू करने की प्रशासन की कोशिश को बाहर से आने वाले ही पलीता लगा रहे हैं। सख्ती के बाद अब लोग ट्रक में छिपकर यात्रा कर रहे हैं और शहर में घुस रहे हैं पिछले तीन कोरोना पॉजिटिव दिल्ली से ट्रक में छिपकर ग्वालियर आये। जिसके बाद से पुलिस ने नाकों पर चैकिंग बढ़ा दी है। रविवार को कंपू थाना पुलिस को चैकिंग के दौरान एक बड़ी सफलता मिली। टी आई विनय शर्मा के मुताबिकचिरवाई नाके पर चैकिंग के दौरान एक प्याज से भरा ट्रक आता दिखा। चैकिंग स्टाफ को ट्रक में भरी प्याज की बोरियों को ढंकने वाले तिरपाल में कुछ लोगों के बाल और चेहरे दिखाई दिये। शक होने पर उसके ट्रक को रोक कर पूछताछ की गई तो उसमें 23 लोग मिले। ये लोग ट्रक के ऊपर और अंदर बैठे थे इनमें महिला और बच्चे भी शामिल हैं । ट्रक ड्राइवर ने बताया कि वो इन्हें झांसी से लाया हैं इन्हें इटावा, औरैया, छतरपुर जाना है। ट्रक को रोक कर वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित कर दिया है। सभी की मेडिकल जांच कराई जा रही है और खाना खिलाया गया है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जायेगी।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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