
Gwalior BJP councilor on road protest
मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और भाजपा के ही नेताओं की सुनवाई नहीं होती, ऐसा पढ़कर थोड़ा आश्चर्य हो रहा होगा लेकिन ये सच है, मामला भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले ग्वालियर शहर का है जहाँ भाजपा की एक महिला पार्षद को सिर्फ इसलिए तपती धूप में बीच सड़क पर धरने पर बिना पड़ा है क्योंकि वो चाहती हैं कि बदहाल सड़क का हाल सुधर जाए, खास बात ये है कि जिस सड़क को बनवाने की मांग को लेकर पार्षद धरने पर बैठी हैं उसका टेंडर, वर्क आर्डर सब कुछ हो चुका है, लेकिन सड़क निर्माण शुरू नहीं हो रहा।
ग्वालियर नगर निगम सीमा क्षेत्र में आने वाले वार्डों में सबसे अधिक सपत्ति कर देने वाला वार्ड 58 सबसे अधिक पॉश कॉलोनियों वाला वार्ड हैं, इसी वार्ड में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का निवास आता है, भाजपा के कई बड़े नेता भी इसी वार्ड में निवास करते हैं, बड़े बड़े व्यापारी, राजनेता, उद्योगपति, सरकारी अधिकारी इस क्षेत्र में रहते हैं और नगर निगम की हठधर्मिता को झेल रहे हैं, इसी क्षेत्र में कई बड़ी कॉलोनियों को जोड़ने वाली सड़क जो बसंत विहार से चेतकपुरी तक जाती है आज वर्षों से बदहाल है जिसको बनवाने के लिए भाजपा की क्षेत्रीय पार्षद अपर्णा पाटिल आज 35 डिग्री तापमान में धरने पर बैठी है।
निगम की हठधर्मिता के खिलाफ भाजपा महिला पार्षद धरने पर
मीडिया से बात करते हुए अपर्णा पाटिल ने बताया कि तीन साल से वे इस सड़क को बनवाने के लिए लड़ाई लड़ रही है, उन्होंने बताया कि इसका टेंडर हो गया वर्क आर्डर हो गया लेकिन फिर भी इसका निर्माण शुरू नहीं हो रहा, उनका आरोप है कि ग्वालियर नगर निगम में कांग्रेस सत्ता में है इसलिए भाजपा के पार्षदों को परेशान किया जा रहा है, नगर निगम के अधिकारी भी उनकी ही सुनते हैं, उन्होंने कहा कि जिस सड़क पर मैं बैठी हूँ समझ नहीं आता कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढे में सड़क है।
बड़े आंदोलन की दी चेतावनी
भाजपा पार्षद अपर्णा पाटिल ने चेतावनी देते हुए कि यदि 10 दिन में इस सड़क का निर्माण शुरू नहीं होता तो वो ऐसा कुछ करेंगी जो मध्य प्रदेश के नगर निगम के इतिहास में नहीं हुआ होगा हालाँकि वे क्या करेंगी इसका खुलासा नहीं किया। लेकिन उनके धरने ने एक बात साफ़ कर दी है कि सियासत में पिसती जनता है, प्रदेश में भाजपा की सरकार लेकिन ग्वालियर में कांग्रेस की नगर सरकार है और बीच में झूलती जनता, ये मामला हमारे जन प्रतिनिधियों की संजीदगी का जीवंत उदाहरण है।
पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

