ग्वालियर सेन्ट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी की मौत, परिजनों ने लगाये मारपीट के आरोप, जाँच की मांग

कैदी नरेंद्र प्रजापति दतिया जिले के रहने वाल था उसपर हत्या का एक प्रकरण था जिसमें वो 2021 से आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा था।
Prisoner death in Gwalior Central Jail

Prisoner death in Gwalior Central Jail

ग्वालियर सेन्ट्रल जेल में हत्या के प्रकरण में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी की मौत हो गई, बाते अज रहा है कि रात को कैदी की तबियत ख़राब हुई और उसे अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई, उधर परिजनों ने संदेह जताते हुए कहा कि उस्ल्की तबियत बिलकुल ठीक थी उसके साथ मारपीट की गई है परिजनों ने जाँच की मांग की है।

ग्वालियर सेन्ट्रल जेल के अन्दर अवैध वसूली और बंदियों के साथ मारपीट के आरोप पिछले कुछ दिनों से चर्चा में हैं, पूर्व बंदी ऋषिपाल सिंह बघेल ने बीते मंगलवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए इस बात का दावा किया था जेल में स्टाफ जेल अधीक्षक के कहने पर बंदियों से अवैध वसूली करते हैं अम्र्पित करते हैं, बीड़ी सिगरेट , नशे का सामान पहुंचाते हैं।

जेल में सजा काट रहे बंदी की अस्पताल ले जाते समय मौत 

अब ऋषिपाल के आरोपों में कितनी सच्चाई है ये जाँच का विषय है लेकिन आज जिस कैदी की मौत हुई है उसके परिजन भी मारपीट के आरोप लगा रहे हैं, आपको बता दें ग्वालियर सेन्ट्रल जेल में हत्या के प्रकरण में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे कैदी नरेंद्र प्रजापति की मौत हो गई, कैदी की उम्र 31 साल थी और वो दतिया का रहने वाला था, पुलिस के मुताबिक जेल से बताया गया कि कल शाम उसकी तबियत ख़राब हुई थी उसे अस्पताल ले जा रहे थे और रास्ते में उसकी मौत हो गई।

परिजन बोले मृतक के सिर और हाथ पर चोट के निशान, जाँच की जाये 

उधर कैदी के परिजनों ने बताया कि जेल से शाम को घर पर फोन आया था कि नरेंद्र की तबियत ख़राब हो गई है और उसके 10 मिनट बाद फिर फोन आया कि उसकी मौत हो गई, परिजनों ने बताया कि 10-12 दिन पहले ही उससे मुलाकात हुई थी तब ठीक था लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि उसकी मौत हो गई, परिजनों ने कहा उसके सिर और हाथ पर चोट के निशान हैं इससे लगता है कि उसके साथ मारपीट की गई है हम चाहते हैं मामले की जाँच की जाये और हमें न्याय मिले।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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