फर्नीचर कारोबारी के साथ लूट, सरे राह मारपीट कर बदमाश ले गए तीन लाख की सोने की चैन

फर्नीचर कारोबारी के साथ लूट, सरे राह मारपीट कर बदमाश ले गए तीन लाख की सोने की चैन

ग्वालियर, अतुल सक्सेना| शहर के गोला का मंदिर क्षेत्र के भिंड रोड पर गुरुवार सुबह एक सनसनीखेज लूट हो गई। बदमाशों ने एक फर्नीचर कारोबारी के साथ मारपीट का उसके गले से करीब तीन लाख रुपए कीमत की सोने की चेन लूट ली। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

गोला का मंदिर थाना प्रभारी ने बताया कि फरियादी राजकुमार शिवहरे भोलेनाथ फर्नीचर के नाम से शो रूम संचालित करते हैं । वे महाराज पुरा क्षेत्र से वसूली कर लौट रहे थे तभी धर्मवीर पेट्रोल पंप के पास बाइक सवार तीन बदमाशों ने उनकी स्कूटी में लात मारी जिससे वे गिर पड़े। बदमाशों ने उन पर लाठी-डंडों सरियों से हमला कर दिया। जिससे उनके सिर ,हाथ और पैर में गंभीर चोट आई है। बदमाश उनके गले से साढे सात तोला वजनी सोने की चेन लूटकर ले गए जिसकी अनुमानित कीमत तीन लाख रुपए बताई गई है घायल कारोबारी किसी तरह गोला का मंदिर पुलिस थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। कारोबारी का कहना है कि बदमाश उन पर और वार करते यदि वहां एक पुलिसकर्मी नहीं पहुंचा होता। पुलिस कर्मी द्वारा बदमाशों का पीछा किए जाने के बाद बदमाश भाग गए। टी आई दीप सिंह सेंगर के मुताबिक कारोबारी का किसी विकास शिवहरे से लेन देन का विवाद चल रहा है जिसमें 6 महीने पहले भी एक मामला दर्ज हुआ था। ये हमला भी उनके द्वारा कराया जाना प्रतीत हो रहा है पुलिस ने मामला दर्ज का जांच शुरू कर है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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