Gwalior News: जूडा पर डीन की तल्ख टिप्पणी- नौकरी नहीं कर रहे, चाहें तो PG छोड़ सकते है

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ग्वालियर, अतुल सक्सेना। जूनियर डॉक्टर्स (Junior Doctors) और शिवराज सरकार (Shivraj  Government) के बीच चली आ रही तकरार अभी जारी है हालांकि हाईकोर्ट (Highcourt) हड़ताल को अवैध घोषित कर चुकी है और जूनियर डॉक्टर्स को काम पर वापस लौटने के लिए कह चुकी है लेकिन जूनियर डॉक्टर्स काम पर वापस नहीं लौटे हैं।उधर ग्वालियर संभाग आयुक्त(Gwalior Divisional Commissioner) ने जूनियर डॉक्टर्स से मिलकर उन्हें समझाने की कोशिश की है वहीं जीआर मेडिकल कॉलेज के डीन ने इस्तीफे पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ये लोग नौकरी नहीं कर रहे ये स्टूडेंट्स है, चाहें तो अपनी पीजी सीट छोड़ सकते हैं।

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चछ सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर गए मध्यप्रदेश के 3000 जूनियर डॉक्टर्स ने कल गुरुवार को सामूहिक इस्तीफे दे दिये। ग्वालियर के जीआर मेडिकल कॉलेज (Gwalior GR Medical College) के 330 जूनियर डॉक्टर्स ने भी इस्तीफा दे दिया था। आज शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज की स्वशासी समिति के अध्यक्ष एवं ग्वालियर ले संभाग आयुक्त आशीष सक्सेना ने जूनियर डॉक्टर्स से मुलाकात की। उनके साथ मेडिकल कॉलेज के प्रभारी डीन डॉ समीर गुप्ता और जयारोग्य अस्पताल समूह के संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक डॉ आरकेएस धाकड़ भी थे।

प्रशासनिक अधिकारियों ने जूनियर डॉक्टर्स को हाई कोर्ट का फैसला पढ़कर सुनाया और कहा कि न्यायालय का फैसला सबको मानना होता हॉ सरकार आपके बारे में सहानुभूतिपूर्वक विचार कर रही है। आपने कोरोना पेंडिमिक में बहुत मेहनत की है ये सरकार भी जानती है । इसलिए ये समय हड़ताल का नहीं मरीजों की सेवा का है।

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उधर ग्वालियर (Gwalior) में मीडिया से बात करते हुए जीआर मेडिकल कॉलेज  के प्रभारी डीन डॉ समीर गुप्ता ने कहा कि जूनियर डॉक्टर्स के बारे में फैसला सरकार को लेना है। हाई कोर्ट ने भी इन्हें 24घंटे का समय दिया है। यहाँ से कोई फैसला नहीं हो सकता। लेकिन जहाँ तक मुझे समझ आता है अधिकांश मांगें मान ली गई हैं। इस्तीफे के स्वीकार होने के सवाल पर डीन डॉ समीर गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि ये हमारे यहाँ नौकरी नहीं कर रहे तो इस्तीफा कैसा? ये तो हमारे पीजी स्टूडेंट्स है ये चाहें तो अपनी पीजी सीट छोड़ सकते हैं।

बहरहाल अब देखना ये होगा कि कोर्ट की टाईम लिमिट, सरकार के प्रयास और ग्वालियर संभाग आयुक्त की समझाइश का ग्वालियर के हड़ताली जूनियर डॉक्टर्स (Gwalior Junior Doctors) पर क्या असर होता है क्या ये अपनी जिद पर अडे रहते हैं या जिद छोड़कर मरीजों की सेवा के लिए वापस आते हैं।

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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

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