नशा करने से रोका तो बदमाशों ने किया लाठी, डंडों से हमला, पत्थर भी फेंके

नशा करने से रोका तो बदमाशों ने किया लाठी, डंडों से हमला, पत्थर भी फेंके

ग्वालियर। अतुल सक्सेना|लॉक डाउन (Lockdown) में पुलिस (Police) की मुस्तैदी का भय अपराधी किस्म के लोगों में दिखाई नहीं दे रहा । उसका ताजा उदाहरण रविवार को मुरार थाना क्षेत्र के तिकोनिया इलाके में देखने को मिला। जहाँ नशेड़ियों का विरोध करने उन्होंने पत्थर फेंककर दहशत फैलाई और मोहल्ले के लोगों पर लाठियों से हमला कर दिया। बदमाशों ने पत्थर भी फेंके।

मुरार थाना क्षेत्र के तिकोनिया इलाके की बंगाली कॉलोनी में रविवार को कुछ बदमाश किस्म के लोगों ने जमकर उत्पात मचाया। लाठी, डंडे और हथियारों से लैस बदमाशों ने यहाँ पत्थरबाजी भी की। बदमाशों की शिकायत करने पुलिस थाने पहुंचे महिला पुरुषों के मुताबिक ये बदमाश आये दिन शराब पीकर हंगामा करते हैं ये बदमाश स्मैक, गांजा जैसे नशे भी करते हैं। मोहल्ले के लोग इन्हें रोकते हैं तो ये लोग गालियाँ देते हैं । इन्हें रोका टोका जाए तो मारपीट करते हैं। शनिवार को जब इन्हें नशाखोरी के लिए टोका गया तो उसका बदला लेने के लिये रविवार को अलबेल, सन्नी, मोनू और सुनील बंगाली कॉलोनी में आये । इन लोगों ने पत्थर फेंके और मोहल्ले में लाठियों से हमला कर दहशत फैलाई। घटना की मोहल्ले के लोगों ने वीडियो बना ली जो वायरल हो रही है। मोहल्ले के लोगों ने बदमाशों द्वारा हवाई फायरिंग करने का भी दावा किया है। पुलिस ने फरियादी की शिकायत पर मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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