इलाज के लिए 3 घंटे तक भटकता रहा परिवहन मंत्री का सहायक, अंततः मौत के आगे हारा

इलाज के लिए 3 घंटे तक भटकता रहा परिवहन मंत्री का सहायक, अंततः मौत के आगे हारा

ग्वालियर, अतुल सक्सेना| मध्यप्रदेश (Madhyapradesh) में कोरोना (Corona) बेकाबू हो रहा है । इसका एक उदाहरण ग्वालियर (Gwalior) में शुक्रवार को सामने आया। परिवहन विभाग में आयुक्त के निजी सहायक पद से सेवानिवृत्त हुए और वर्तमान में प्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद राजपूत (Govind Singh Rajput) के स्टाफ में काम कर रहे नीलकंठ खर्चे (Nilkanth kharche) ने कोरोना के चलते दम तोड़ दिया ।

खर्चे भोपाल में परिवहन मंत्री के बंगले पर उनका काम देखते थे। कुछ दिन पहले जब उनका स्वास्थ्य खराब हुआ तो वह ग्वालियर चले गए और घर पर ही जाकर आराम करने लगे । शनिवार को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और उनकी पत्नी उन्हें लेकर ग्वालियर के मुरार स्थित कल्याण अस्पताल पहुंची । अस्पताल के दरवाजे पर वे गिङगिङाती रही लेकिन उनको एडमिट करने के बजाए दूसरे अस्पताल जाने की सलाह दी गई । इस पर खर्चे की पत्नी ने अपने एक परिचित एसडीएम को फोन लगाया और उनके कहने पर बमुश्किल उन्हें पहले जयारोग्य अस्पताल और बाद में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल ले जाया गया। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और नीलकंठ का ऑक्सीजन लेवल 40 तक पहुंच गया था ।अंतत उनकी मौत हो गई ।

अब सवाल यह है कि परिवहन मंत्री के स्टाफ में पदस्थ एक व्यक्ति को इलाज के अभाव में इस तरह दम तोड़ना पड़ सकता है तो फिर आम आदमी की हालत क्या होगी। ग्वालियर में सूत्रों की माने तो हालत यह है कि कोरोना के चलते अस्पतालों के बेड फुल हो गए हैं और मरीजों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है।ऐसे मे मरीज जाऐ तो कहा।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews