MP: लॉक डाउन के बीच तहसीलदार के बंगले पर महिलाओं का धरना

MP: लॉक डाउन के बीच तहसीलदार के बंगले पर महिलाओं का धरना

डबरा।यशवंत श्रीवास्तव
कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के चलते लोगों को भोजन और राशन उपलब्ध कराने के दावे प्रशासन लगातार कर रहा है पर इन सबके बीच आज दर्जनों महिलाएं तहसीलदार नवनीत शर्मा के बंगले पर धरना देने पहुंच गई महिलाओं का कहना था कि उनके घर पर खाने पीने का कोई भी राशन उपलब्ध नहीं है और शासन से भी उन्हें कोई मदद नहीं मिल पा रही उनके पति रोज मेहनत मजदूरी करते थे वह भी इस समय बंद है।सबसे बड़ी बात यह है कि ग्वालियर जिले में इस समय संपूर्ण लॉकडाउन चल रहा है इसके बावजूद भी महिलाओं का झुंड के रूप में आना और तहसीलदार के बंगले पर धरना देना अचरज का विषय है साथ ही कोरोना जैसी महामारी के बीच में चल रहे सोशल डिस्टेंस के नियम का भी यहाँ पूर्ण रूप से उल्लंघन होते दिखा महिलाओं को बीमारी से ज़्यादा भूखे पेट की चिंता थी।तहसीलदार तो महिलाओं को नहीं मिले पर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें जरूर आश्वासन दिया है कि वे उनके घर पर प्रतिदिन खाने के पैकेट उपलब्ध कराएंगे।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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