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फरीदाबाद में केंद्र पर बरसे भूपेंद्र हुड्डा, बोले- SYL पर एक्शन ले सरकार, UGC मामले में कोर्ट पर भरोसा

Written by:Banshika Sharma
Published:
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने फरीदाबाद में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सतलुज-यमुना लिंक (SYL) पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने की मांग की और UGC के नए नियमों पर न्यायपालिका में विश्वास जताया।
फरीदाबाद में केंद्र पर बरसे भूपेंद्र हुड्डा, बोले- SYL पर एक्शन ले सरकार, UGC मामले में कोर्ट पर भरोसा

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने फरीदाबाद में केंद्र और प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर विवाद, UGC के नए नियमों, मनरेगा और लाडो लक्ष्मी योजना जैसे कई अहम मुद्दों पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

SYL पर सरकार को घेरा

सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर के मुद्दे पर हुड्डा ने कहा कि इस मामले में जनता को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बार-बार बैठकें करने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही हरियाणा के पक्ष में फैसला सुना चुका है।

“सुप्रीम कोर्ट का फैसला 2002 में आया था और 2016 में भी हरियाणा के पक्ष में निर्णय हुआ। अब इसे लागू कराने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार और पंजाब सरकार की है। सुप्रीम कोर्ट से बड़ा कोई नहीं होता।” — भूपेंद्र सिंह हुड्डा

हुड्डा ने याद दिलाया कि जब तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, तब प्रधानमंत्री से मिलने का फैसला हुआ था। उन्होंने मौजूदा सरकार से आग्रह किया कि वह इस मामले में अदालत की अवमानना (कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट) की कार्रवाई करे।

UGC, मनरेगा और अन्य योजनाओं पर सवाल

UGC के नए नियमों को लेकर पूछे गए सवाल पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने सरकार को सलाह दी कि कोई भी फैसला जल्दबाजी में नहीं, बल्कि सोच-समझकर लेना चाहिए।

मनरेगा योजना की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ नाम बदलने से कुछ नहीं होता, जमीनी स्तर पर काम दिखना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा में मनरेगा के तहत करीब 8 लाख श्रमिक पंजीकृत हैं, लेकिन सरकार केवल 2100 लोगों को ही 100 दिन का रोजगार मुहैया करा सकी है।

इसके अलावा, हुड्डा ने लाडो लक्ष्मी योजना पर भी सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले 18 से 60 साल तक की सभी महिलाओं को आर्थिक सहायता देने का वादा किया गया था, जिससे राज्य की लगभग 85 लाख महिलाओं को लाभ मिलता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।