गुरुग्राम: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को गुरुग्राम की धरती पर एक महत्वपूर्ण खेल आयोजन का शुभारंभ किया। उन्होंने क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड इन इंडिया द्वारा आयोजित 8वें इंडसइंड बैंक नागेश ट्रॉफी राष्ट्रीय पुरुष दृष्टिहीन क्रिकेट प्रतियोगिता का उद्घाटन किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि यह प्रतियोगिता आने वाले दिनों में अनेक प्रेरक कहानियां लिखेगी।
मुख्यमंत्री ने इस आयोजन को सामाजिक बदलाव का एक बड़ा माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि यहां से निकलने वाले खिलाड़ी न सिर्फ देश का नाम रोशन करेंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल और आदर्श भी बनेंगे।
प्रेरणा बनेंगे दृष्टिहीन खिलाड़ी: CM सैनी
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि जब कोई बच्चा किसी दृष्टिहीन खिलाड़ी को मैदान में असाधारण प्रदर्शन करते हुए देखता है, तो उसके मन में यह विश्वास गहरा होता है कि मेहनत और लगन से कोई भी सपना हासिल किया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कुछ भी असंभव नहीं है।
“जब कोई बच्चा किसी दृष्टिहीन खिलाड़ी को मैदान में शानदार प्रदर्शन करते हुए देखता है, तो उसके मन में यह विश्वास पैदा होता है कि कोई भी सपना असंभव नहीं है। नागेश ट्रॉफी जैसी प्रतियोगिताएं समाज में सम्मान, अवसर और समानता की भावना को और मजबूत करती हैं।”- नायब सिंह सैनी, मुख्यमंत्री, हरियाणा
सैनी ने कहा कि इस तरह के टूर्नामेंट समाज में सम्मान, अवसर और समानता की भावना को और भी मजबूत करने का काम करते हैं।
खेल से बदलती है समाज की सोच
मुख्यमंत्री ने खेल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह केवल जीत और हार तक ही सीमित नहीं है। यह आयोजन याद दिलाता है कि खेल चरित्र निर्माण, आत्म-अनुशासन और सामाजिक एकता का एक शक्तिशाली माध्यम है। उन्होंने कहा, “जब खिलाड़ी मैदान में उतरते हैं, तो वे सिर्फ क्रिकेट नहीं खेलते, बल्कि समाज की पारंपरिक सोच को बदलने का महत्वपूर्ण कार्य भी करते हैं।”
दिव्यांग सशक्तिकरण के लिए सरकार प्रतिबद्ध
नायब सिंह सैनी ने केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबके प्रयास’ के मंत्र को पूरी निष्ठा के साथ साकार कर रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।





