पंचकूला। हरियाणा में स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली करीब 20,000 आशा वर्कर्स 12 फरवरी को प्रदेशव्यापी हड़ताल पर रहेंगी। आशा वर्कर्स यूनियन ने केंद्रीय आम बजट को ‘जनविरोधी’ बताते हुए एक दिवसीय काम बंद का ऐलान किया है। यह हड़ताल केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और आशा वर्कर्स एंड फैसिलिटेटर फेडरेशन के राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत की जा रही है।
यूनियन का आरोप है कि केंद्र सरकार का बजट आम लोगों की बुनियादी जरूरतों और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के बजाय बड़े पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने वाला है। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य का ढांचा कमजोर हो रहा है। यूनियन ने सरकार से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने और जनता को बेहतर व सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं देने की मांग की है।
मानदेय में देरी और ऑनलाइन काम का दबाव
आशा वर्कर्स ने केवल बजट ही नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर अपने साथ हो रहे व्यवहार पर भी गहरा रोष व्यक्त किया है। यूनियन प्रतिनिधियों के अनुसार, उन्हें समय पर मानदेय नहीं दिया जाता और अक्सर उसमें मनमाने ढंग से कटौती कर दी जाती है। पिछले दो वर्षों से रिकॉर्ड रखने के लिए रजिस्टर तक मुहैया नहीं कराए गए हैं, जिससे उन्हें अपने खर्च पर काम चलाना पड़ रहा है।
इसके अलावा, विभागीय अधिकारियों द्वारा लगातार नए-नए ऑनलाइन कार्यों का दबाव बनाकर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। यूनियन का कहना है कि यह काम तकनीकी है और फील्ड वर्क के साथ इसे संभालना व्यावहारिक नहीं है। सोमवार को डॉक्टर वीरेंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि जब तक इन समस्याओं का समाधान नहीं होता, कोई भी आशा वर्कर ऑनलाइन काम नहीं करेगी।
ये हैं प्रमुख मांगें
यूनियन ने सरकार के सामने अपनी कई प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनके पूरा न होने पर आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी गई है।
मुख्य मांगें:
- आशा वर्कर्स को पक्का कर्मचारी बनाया जाए।
- न्यूनतम वेतन 30,000 रुपये प्रति माह और सामाजिक सुरक्षा लाभ दिए जाएं।
- अप्रैल 2025 में घोषित 1500 रुपये की बढ़ोतरी को तुरंत लागू किया जाए।
- साल 2023 के आंदोलन के दौरान काटे गए 73 दिनों के मानदेय का भुगतान हो।
- ऑनलाइन काम का दबाव पूरी तरह से खत्म किया जाए।
- महंगाई भत्ते के साथ मातृत्व अवकाश का लाभ मिले।





