चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र की कार्यवाही मंगलवार को वंदेमातरम् के मुद्दे पर गरमा गई। राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जैसे ही राष्ट्रगीत को लेकर कांग्रेस के ऐतिहासिक रुख पर सवाल उठाए, सदन में विपक्ष ने भारी हंगामा शुरू कर दिया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि कांग्रेस के विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया, हालांकि वे कुछ देर बाद वापस लौट आए।
यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि इस बार सदन के अधिवेशन की शुरुआत वंदेमातरम् से हुई है, जो गर्व की बात है, लेकिन विपक्ष ने इस पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कांग्रेस के इतिहास पर सवाल उठाते हुए 1937 की एक घटना का जिक्र किया।
जब नेहरू ने नेताजी को लिखा था पत्र
मुख्यमंत्री सैनी ने दावा किया कि 1937 में मुस्लिम लीग के कड़े विरोध के कारण तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व ने वंदेमातरम् पर समझौता कर लिया था। उन्होंने कहा, “मुस्लिम लीग के विरोध के कारण 1937 में जवाहर लाल नेहरू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को एक पत्र लिखा था। उस पत्र में कहा गया था कि मैंने वंदेमातरम् गीत की पृष्ठभूमि पढ़ी है और इससे मुस्लिम भड़क जाएंगे।”
सीएम सैनी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने उस समय मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिए थे और राष्ट्रगीत के टुकड़े कर दिए थे। उन्होंने कहा कि यह वही क्षण था जब एक राष्ट्रगीत की सम्मान भावना को संदेह के घेरे में डाल दिया गया और यहीं से विश्वासघात की पीड़ा का आभास हुआ।
“विपक्ष के विधायक सवाल करते हैं, सरकार से जवाब मांगते हैं, लेकिन जब सरकार इन्हें जवाब देती है तो सुनने की बजाय वॉकआउट कर चले जाते हैं।”- नायब सिंह सैनी, मुख्यमंत्री, हरियाणा
मुख्यमंत्री के इन बयानों के बाद कांग्रेस विधायक अपनी सीटों पर खड़े होकर विरोध करने लगे। उस समय विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा सदन में मौजूद नहीं थे। स्पीकर हरविन्द्र कल्याण ने विधायकों को शांत कराने की कई बार कोशिश की, लेकिन हंगामा नहीं थमा, जिसके बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
‘वंदेमातरम् राष्ट्र की आत्मा और चेतना’
विपक्ष के वॉकआउट पर प्रतिक्रिया देते हुए नायब सैनी ने कहा कि जब सरकार उनके सवालों का जवाब देती है तो वे सुनने का साहस नहीं जुटा पाते। उन्होंने वंदेमातरम् के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह हमारे राष्ट्र की आत्मा और सांस्कृतिक चेतना है।
सीएम ने कहा, “जिस गीत ने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने का साहस दिया, उस वंदेमातरम् का पुनः स्मरण करना हम सबके लिए सौभाग्य की बात है। हम वंदेमातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के साक्षी बने हैं। यह केवल समय की गणना नहीं, बल्कि राष्ट्र के पुनर्जागरण और स्वाभिमान की गाथा है।”






