हरियाणा में सरकारी फंड से जुड़े करीब 590 करोड़ रुपए के बड़े बैंकिंग घोटाले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अपने हाथ में ले ली है। दरअसल यह कथित घोटाला फर्जी बैंकिंग लेनदेन, जाली हस्ताक्षर और शेल कंपनियों के जरिए पैसे ट्रांसफर करने से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच एजेंसी अब इस मामले में विदेशों में पैसा भेजे जाने की आशंका को देखते हुए इंटरनेशनल एंगल की भी जांच कर रही है।
दरअसल दस्तावेजों के अनुसार यह मामला सरकारी योजनाओं के फंड के दुरुपयोग और संगठित तरीके से किए गए मल्टी-लेयर बैंकिंग फ्रॉड से जुड़ा है। इस मामले में IDFC First Bank और AU Small Finance Bank के खातों के जरिए लेनदेन होने की बात सामने आई है। आरोप है कि फर्जी चेक और जाली हस्ताक्षरों के माध्यम से सरकारी फंड को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया।
जानिए क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक 26 सितंबर 2025 को इन दोनों बैंकों में विभाग की ओर से दो खाते खोले गए थे। इनमें महात्मा गांधी ग्रामीण आवास योजना (एमएमजीएवाई-2.0) के तहत क्रमशः 50 करोड़ और 25 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। हालांकि इन फंड्स के इस्तेमाल के लिए किसी सक्षम प्राधिकरण की अनुमति जारी नहीं की गई थी। विभाग सामान्य तौर पर डेबिट नोट के जरिए भुगतान करता है, लेकिन यहां चेक के माध्यम से भी लेनदेन किए जाने के रिकॉर्ड मिले हैं। कई चेकों पर तत्कालीन निदेशक के जाली हस्ताक्षर होने की बात सामने आई है, जबकि वे उस पद से पहले ही इस्तीफा दे चुके थे।
इस मामले में पहली एफआईआर 23 फरवरी 2026 को पंचकूला में दर्ज की गई थी। इसके बाद 25 मार्च 2026 को हरियाणा सरकार ने सीबीआई जांच के लिए सहमति दी। अंत में 8 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने सीबीआई को पूरे राज्य में इस मामले की जांच करने की अनुमति दे दी।
पुराने या जाली हस्ताक्षरों से लेनदेन जारी रहे
सीबीआई की एफआईआर में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। जांच में पाया गया कि विभाग ने चेक से भुगतान किए जाने की बात से इनकार किया था, लेकिन बैंक रिकॉर्ड में चेक के आधार पर ट्रांजेक्शन प्रोसेस किए जाने के सबूत मिले हैं। इसके अलावा कई चेकों पर पूर्व निदेशक डी.के. बेहरा के हस्ताक्षर पाए गए, जबकि वे अक्टूबर 2025 में ही पद छोड़ चुके थे। दिसंबर 2025 में विभाग की ओर से नए हस्ताक्षर अपडेट करने का पत्र बैंकों को भेजा गया था, फिर भी बाद में पुराने या जाली हस्ताक्षरों से लेनदेन जारी रहे।
जांच में एक चेक में राशि को लेकर भी गड़बड़ी सामने आई है। चेक में अंकों में 2.50 करोड़ रुपए लिखे गए थे, जबकि शब्दों में 25 करोड़ रुपए दर्ज किए गए थे। इसके अलावा कुछ बैंक स्टेटमेंट भी संदिग्ध पाए गए हैं, जिससे जांच एजेंसियों को गुमराह करने की कोशिश का संदेह जताया गया है। रिकॉर्ड के मुताबिक करीब 46.56 करोड़ रुपए का ट्रांसफर AU Small Finance Bank के खाते में किया गया था। इसके साथ ही हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम पंचकूला के नाम पर भी संदिग्ध लेनदेन दिखाए गए हैं, जिनका स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है।
इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। सीबीआई अब बैंक अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों और अन्य संदिग्ध लोगों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है।






