Hindi News

SYL विवाद: चंडीगढ़ में आज हरियाणा-पंजाब के CM की अहम बैठक, केंद्र की गैरमौजूदगी में समाधान की कोशिश

Written by:Banshika Sharma
Published:
सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर विवाद पर आज चंडीगढ़ में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब के CM भगवंत मान के बीच बैठक होगी। सुप्रीम कोर्ट के दबाव और केंद्र सरकार की मध्यस्थता से हटने के बाद, दोनों राज्य एक बार फिर इस दशकों पुराने मुद्दे का हल निकालने की कोशिश करेंगे।
SYL विवाद: चंडीगढ़ में आज हरियाणा-पंजाब के CM की अहम बैठक, केंद्र की गैरमौजूदगी में समाधान की कोशिश

दशकों से चले आ रहे सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर विवाद पर समाधान तलाशने के लिए आज एक बार फिर हरियाणा और पंजाब आमने-सामने होंगे। चंडीगढ़ स्थित हरियाणा निवास में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री, नायब सिंह सैनी और भगवंत मान, शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। इस बार यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें केंद्रीय जल शक्ति मंत्री शामिल नहीं हो रहे हैं।

यह बैठक सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और केंद्र सरकार के उस रुख के बाद हो रही है, जिसमें दोनों राज्यों को आपसी बातचीत से हल निकालने को कहा गया है। बैठक से एक दिन पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मामले की ताजा स्थिति पर मंथन किया और राज्य का पक्ष मजबूती से रखने की रणनीति बनाई।

अपने-अपने रुख पर अड़े दोनों राज्य

इस विवाद पर दोनों राज्यों का रुख बिल्कुल स्पष्ट और एक-दूसरे से अलग है। हरियाणा का तर्क है कि नहर का निर्माण उसका वैधानिक अधिकार है, जिससे उसे उसके हिस्से का पानी मिल सकेगा। वहीं, पंजाब लगातार पानी की कमी का हवाला दे रहा है।

“पंजाब के पास किसी को देने के लिए एक बूंद भी अतिरिक्त पानी नहीं है, इसलिए SYL नहर के निर्माण का सवाल ही पैदा नहीं होता।” — भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब

मुख्यमंत्री भगवंत मान कई मौकों पर यह साफ कर चुके हैं कि पंजाब के भूजल स्तर में भारी गिरावट आई है और राज्य अपने हिस्से का पानी किसी भी सूरत में नहीं दे सकता।

जब केंद्र ने मध्यस्थता से खींचे हाथ

इससे पहले केंद्र सरकार की मध्यस्थता में कई दौर की बैठकें बेनतीजा रही हैं। पिछले साल केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में भी बैठकें हुई थीं, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। इसके बाद नवंबर में केंद्र ने दोनों मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर आपसी बातचीत से समाधान खोजने की सलाह दी। पत्र में कहा गया था कि जरूरत पड़ने पर केंद्र आवश्यक सहयोग देगा। इससे पहले फरीदाबाद में हुई उत्तरी जोनल काउंसिल की बैठक में भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नदी जल से जुड़े मुद्दों को टाल दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में अंतिम चरण में मामला

SYL का यह विवादित मामला सुप्रीम कोर्ट में अपने अंतिम पड़ाव पर है। अदालत ने कई बार दोनों राज्यों को आपसी सहमति से हल निकालने का निर्देश दिया है। जनवरी 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब को एक साल के भीतर नहर बनाने का आदेश दिया था। हरियाणा ने इसी आदेश के पालन के लिए याचिका दायर कर रखी है। 214 किलोमीटर लंबी इस नहर का 122 किलोमीटर हिस्सा पंजाब में बनना है, जो दशकों से अधूरा पड़ा है।

विवाद का लंबा इतिहास

SYL विवाद की जड़ें 1966 में हरियाणा के गठन के साथ ही जुड़ी हैं। इस विवाद के कुछ प्रमुख पड़ाव इस प्रकार हैं:

1981: प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मौजूदगी में दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे का समझौता हुआ।
1982: इंदिरा गांधी ने पटियाला के कपूरी गांव में नहर निर्माण की शुरुआत की, जिसके बाद अकाली दल ने इसका विरोध शुरू कर दिया।
1985: राजीव-लोंगोवाल समझौते में पंजाब नहर निर्माण के लिए सहमत हुआ।
1990: नहर निर्माण से जुड़े दो वरिष्ठ इंजीनियरों की हत्या के बाद काम रुक गया।
2004: पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विधानसभा में कानून पास कर 1981 के जल समझौते को रद्द कर दिया।
2016: सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के 2004 के कानून को असंवैधानिक करार दिया।

लगातार बैठकों और सुप्रीम कोर्ट की दखल के बावजूद यह मुद्दा आज भी हरियाणा और पंजाब के बीच एक बड़े विवाद का कारण बना हुआ है। अब देखना यह है कि क्या चंडीगढ़ में हो रही यह द्विपक्षीय बैठक इस गतिरोध को तोड़ने में कामयाब हो पाती है।