बड़ा झटका: सिंधिया समर्थक कांग्रेस विधायक को लेकर याचिका खारिज, वकील पर 25000 का जुर्माना

बड़ा झटका: सिंधिया समर्थक कांग्रेस विधायक को लेकर याचिका खारिज, वकील पर 25000 का जुर्माना

ग्वालियर। अतुल सक्सेना मध्यप्रदेश में चल रहे सियासी घमासान के बीच मप्र हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में विधायक मुन्ना लाल गोयल को लेकर दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है साथ ही याचिकाकर्ता पर कोर्ट का समय बर्बाद करने के लिए 25000 रुपये का अर्थदण्ड भी लगाया है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद उनके समर्थन में 22 विधायकों के साथ ही कांग्रेस छोड़ने वाले सिंधिया समर्थक ग्वालियर पूर्व विधानसभा के विधायक मुन्ना लाल गोयल करीब 12 दिनों से बंगलुरु में अपने दोस्तों के साथ रह रहे हैं। कांग्रेस लगातार ये आरोप लगा रही है कि भाजपा ने उन्हें बंधक बना रखा है। इसी बीच मप्र हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के एडवोकेट उमेश बोहरे ने विधायक मुन्ना लाल को बंधक बताते हुए 16 मार्च को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। याचिका की सुनवाई गुरुवार को एस ए धर्माधिकारी को कोर्ट में हुई। जस्टिस धर्माधिकारी ने याचिकाकर्ता उमेश बोहरे की याचिका को मुन्ना लाल गोयल के पुत्र की तरफ से दायर याचिका के आधार पर खारिज कर दिया। मुन्ना लाल गोयल के बेटे मयंक गोयल की तरफ से पेश हुए वकील अवधेश सिंह तोमर ने तथ्य पेश करते हैं कहा कि मुन्ना लाल गोयल को किसी ने बंधक नहीं बनाया वे बंगलुरु में अपने दोस्तों के साथ अपनी मर्जी से रुक हैं। जिसका प्रमाण वे वीडियो के माध्यम से भी कर चुके हैं। साथ ही यदि उनका यदि अपहरण हुआ होता तो किसी पुलिस थाने में उनकी गुमशुदगी दर्ज होती। न्यायालय ने सभी तथ्यों को सुनने के बाद उमेश बोहरे की याचिका को बहस के योग्य नहीं माना और खारिज का दिया। मयंक गोयल के वकील अवधेश सिंह तोमर ने कोर्ट से निवेदन किया कि याचिकाकर्ता एडवोकेट को इस तरह की याचिका लगाने की आदत सी है। और कई बार न्यायालय उन पर कॉस्ट भी लगा चुके हैं। उन्होंने मांग की कि इस बार भी हैवी कोस्ट लगाई जाए। एडवोकेट अवधेश सिंह तोमर की मांग पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता एडवोकेट उमेश बोहरे पर कोर्ट का कीमती समय बर्बाद करने के लिए 25000 रुपये की कॉस्ट यानि अर्थदंड लगाया है।

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