स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नरेंद्र सिंह (नाथू सिंह) तोमर को राष्ट्रपति ने भेजा सम्मान, 1942 में आज ही के दिन शुरू हुआ था ‘भारत छोड़ो आंदोलन’

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नरेंद्र सिंह (नाथू सिंह) तोमर को राष्ट्रपति ने भेजा सम्मान, 1942 में आज ही के दिन  शुरू हुआ था ‘भारत छोड़ो आंदोलन’

इंदौर, आकाश धोलपुरे

मध्यप्रदेश के इंदौर के पिवडाय गांव में रहने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नाथू सिंह उर्फ नरेंद्र सिंह तोमर को आज राष्ट्रपति ने सम्मानित किया। प्रतीक के रूप में आज सुबह प्रशासन ने उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ओर से सम्मानित किया गया।

ग्राम पिवडाय में रहने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नरेंद्र सिंह तोमर का सम्मान जिला प्रशासन इंदौर की ओर से एसडीएम रवीश श्रीवास्तव ने किया। इस मौके पर 97 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नरेंद्र तोमर को श्रीफल और अंगवस्त्र के साथ ही प्रतीक चिन्ह भी भेंट किया गया। अपने ओजस्वी लेखन और मधुर वाणी के जरिये 40 के दशक में इंदौर में वो तत्कालीन ब्रिटिश साम्राज्य का खुलकर विरोध करते थे।

राष्ट्रीय स्तर पर एक कवि और ऊर्जावान सेनानी के तौर पर पहचाने जाने नाथू सिंह उर्फ नरेंद्र सिंह तोमर इंदौर और खरगोन की जेल में रहे है। ब्रिटिश शासन काल के दौरान जब इंदौर के सुभाष चौक पर राष्ट्रीय स्तर का कोई बड़ा नेता आता था और कार्यक्रम होता था तब जनता उनकी मधुर वाणी के जरिये ओजस्वी विचारों को सुनने के लिए बेकरार रहते थे। एसडीएम रवीश श्रीवास्तव ने बताया कि आज अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी माननिये नरेंद्र सिंह तोमर के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान के चलते आज उनका प्रतीक के रूप में शासन के नुमाइंदे के रूप आज हमने उनका सम्मान किया है जो हमारे गौरव की बात है।

नाथूसिंह से नरेंद्र सिंह तोमर इसलिए बने स्वतंत्रता सेनानी

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के 6 बेटे है और उनमें से एक बेटे योगेश सिंह तोमर ने कई वाक्ये उस दौर के सुनाए। उन्होंने बताया कि कई रचनाएं लिखने और सम्मान हासिल करने वाले उनके पिता ने स्वतंत्रता संग्राम के पश्चात राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या के बाद अपना नाम बदल दिया था उसकी वजह ये रही कि महात्मा गांधी के हत्यारे का नाम नाथूराम था। ऐसे में उनके पिता ने अपना नाम बदल दिया था।

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