इंदौर प्रशासन ने पूरी की कमलनाथ की यह मांग

इंदौर प्रशासन ने पूरी की कमलनाथ की यह मांग

इंदौर।आकाश धौलपुरे।

इंदौर जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री कमलनाथ की मांग मान ली है जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ट्वीट करके की थी। दरअसल इंदौर में तीन दिन के लॉक डाउन के दौरान दूध वितरण तक पर रोक लगा दी गई थी जिसको लेकर रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शिवराज  को ट्वीट किया था और उसमें लिखा था कि लॉक डाउन का सख्ती से पालन जरूरी है लेकिन जिस तरह से दूध की सप्लाई बंद करने का भी जिला प्रशासन ने निर्णय लिया है बेहद आपत्तिजनक है ।

दूध दवाई आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में आती है और देश भर में आवश्यक वस्तु पर कोई रोक नहीं है ।इस निर्णय से उन बच्चों ,बुजुर्गों और मरीजों का क्या होगा जो दूध पर ही आश्रित हैं। ट्वीट में यह भी लिखा था कि उन पशुपालकों के बारे में भी सोचे जो पूर्व से ही दोहरी मांग झेल रहे हैं और जनहित में इस निर्णय को तुरंत बदला जाए ।इसके साथ ही इंदौर के कई संस्थाओं ने भी इस निर्णय को बदले जाने की मांग की थी ।अब जिला प्रशासन ने दूध की सप्लाई में आज शाम 5:00 से 7:00 तक की छूट दे दी है। दूध सप्लाई वालों को किसी तरह के पास की जरूरत नहीं होगी और पुलिस अमले को भी बता दिया गया है कि कि इन्हे घर-घर जाकर दूध बांटने दिया जाए ।इसी तरह सांची व अमूल की गाड़ियों को भी पास देकर अनुमति दी जाएगी ।कल से यह व्यवस्था सुबह 6:00 से 9:00 के बीच में रहेगी। कलेक्टर मनीष सिंह ने दूध बाटने वालों से और जनता से अनुरोध किया है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन अनिवार्य रूप से करें ताकि संक्रमण का खतरा ना फैले

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews