सिंधिया को लेकर बोले नरोत्तम, वे बड़े नेता हैं उनका हृदय स्वागत है

सिंधिया को लेकर बोले नरोत्तम, वे बड़े नेता हैं उनका हृदय स्वागत है

अतुल सक्सेना/ग्वालियर। मध्य प्रदेश में सियासी संकट के बीच कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के कयास के सवाल भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि वे बहुत बड़े नेता हैं । हम तो सामान्य कार्यकर्ता का भी स्वागत करते हैं अगर सिंधिया जी पार्टी में आते हैं तो उनका खुले दिल से स्वागत है। मिश्रा ने शायराना अंदाज में कहा कि ‘दुश्मनों के तीर खाकर दोस्तों के शहर में, उनको किस किस ने मारा यह कहानी फिर कभी। नरोत्तम ने कहा कि कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी यूँ ही कोई बेवफा नहीं होता।

आपको बता दें कि आज सुबह सिंधिया की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह से ​दिल्ली में मुलाकात हो चुकी है। और अब ये खबर पक्की हो गई है कि सिंधिया को बीजेपी कोटे से राज्यसभा भेजा जाएगा। सिंधिया ने पीएम हाउस जाकर मोदी से मुलाकात की। इससे पहले सोमवार देर रात कमलनाथ ने मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई थी जिसमें करीब 20 मंत्रियों ने अपना इस्तीफा दे दिया था लेकिन करीब 8 मंत्री इस बैठक में शामिल नहीं हुए। मंत्रीमंडल के 28 मंत्रियों में से 8 मंत्री सिंधिया समर्थक हैं। इसी के साथ करीब 27 सिंधिया समर्थक विधायकों से भी कांग्रेस का संपर्क नहीं हो पा रहा है। इस सारे समीकरणों के बीच सिंधिया की पीएम से मुलाताक और नरोत्तम के उनके खुले ह्रदय से स्वागत के बयान ने लंबे समय से कायम सिंधिया की चुप्पी के सारे राज़ खोल दिये हैं। अब सबकी नजर आज होने वाली कांग्रेस और बीजेपी विधायक दल की बैठक पर है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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