राहुल का सिंधिया पर तंज, कहा विचारधारा जेब में रख आरएसएस में हुए शामिल

राहुल का सिंधिया पर तंज, कहा विचारधारा जेब में रख आरएसएस में हुए शामिल

नई दिल्ली।

ज्योतिरादित्य सिंधिया(jyotiraditya scindia) के भाजपा(bjp) में शामिल होने के बाद पहली बार राहुल गांधी(rahul gandhi) ने उनपर निशाना साधा है। जहां उन्होंने सिंधिया पर यह कहते हुए तंज कसा है कि उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य के डर से भाजपा का हाथ थामा है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह विचारधारा की लड़ाई है जहां सिंधिया(scindia) आरएसएस की विचारधारा अपनाने चले गए हैं।

गौरतलब हो कि गुरुवार को संसद(parliament) की स्पेशल प्रेस ब्रीफिंग में उन्होंने सिंधिया पर जमकर हमला बोला है। राहुल गांधी ने कहा कि स्पष्ट तौर पर यह विचारधारा की लड़ाई है।जहाँ उन्हें अपनी राजनीतिक भविष्य का डर सता रहा था इसलिए उन्होंने अपनी विचारधारा को जेब में रख लिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा की आरएसएस विचारधारा से मिलने के बाद भी सिंधिया को बीजेपी में उचित सम्मान नहीं मिल पाएगा। सिंधिया पर कटाक्ष करते हुए राहुल ने कहा कि मैं उनके साथ पढ़ा हूं। उन्हें अच्छे से जानता हूं। वो जो कह रहे हैं वो उनके दिल की आवाज नहीं है। उनके मन में कुछ और जुबां पर कुछ और है। वहीं प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर लेते हुए पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आज जो अर्थव्यवस्था की बुरी स्थिति है। वह महज शुरुआत है, अभी इसकी और बदहाली बाकी है। राहुल गांधी ने अर्थवयवस्था पर बोलते हुए कहा कि शेयर मार्केट(share market) से लाखों लोगों को नुकसान हो रहा है। अर्थव्यवस्था की हालत खराब है। कोरोना का असर बाज़ार और व्यापार पर भी हो रहा है। किंतु सरकार इसपर मुख्य कदम नहीं उठा पा रही है। हमने अर्थव्यवस्था को अच्छे से संभाला था। हम अर्थव्यवस्था संभालना जानते हैं जबकि प्रधानमंत्री को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।

इससे पहले बुधवार को राहुल गांधी ने मीडिया से सिंधिया के आरोप पर चर्चा करते हुए कहा था कि वह उनके ऐसे अकेले मित्र हैं जो कभी भी उनके घर आ सकते हैं। बता दे कि सिंधिया ने गांधी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने सिंधिया को मिलने का वक्त नहीं दिया था।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews