PHOTOS: कमलनाथ के मंत्री ने फेंकी बॉल, सिंधिया ने जमकर लगाए चौके-छक्के

PHOTOS: कमलनाथ के मंत्री ने फेंकी बॉल, सिंधिया ने जमकर लगाए चौके-छक्के

भोपाल/इंदौर। इन दिनों एमपी की राजनीति में चर्चा का विषय बने कांग्रेस के दिग्गज ज्योतिरादित्य सिंधिया के अलग अलग अंदाज देखने को मिल रहे है।कभी वे कमलनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्रियों के साथ भोज करते हुए नजर आ रहे है तो कभी मंत्रियों से हंसी ठिठोली। लेकिन रविवार को राजनीति से उलट सिंधिया क्रिकेट के मैदान में चौके-छक्के लगाते हुए नजर आए।

दरअसल, इंदौर डेली कॉलेज परिसर स्थित सिंधिया क्रिकेट मैदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया गया।रविवार को सिंधिया पैवेलियन का लोकार्पण मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष महाराजा ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया। इस दौरान डेली कॉलेज बोर्ड प्रेसिडेंट एकादश तथा मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन एकादश के बीच में एक मैत्री क्रिकेट मैच भी खेला गया।इस दौरान सिंधिया ने भी अपना हाथ अजमाया और जमकर चौके छक्के लगाए। अपनी व्यस्त राजनीति दिनचर्या से हटकर सिंधिया ने पैड और ग्लब्स पहनकर जब मैदान में बल्ला संभाला तो तालियों से स्टेडियम गूंज उठा ।खास बात ये रही कि ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह ने बॉलिंग की तो वहीं दर्शक के रूप में स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट मौजूद रहे।

हालांकि यह पहला मौका नही है। इसके पहले भी कई बार सिंधिया क्रिकेट खेलते हुए नजर आए है। सिंधिया को क्रिकेट खेलना काफी पसंद हैं, राजनीति से उन्हें जब भी समय मिलता है वह क्रिकेट खेलने का मौका नहीं छोड़ते। रविवार को मौका मिला तो वे अपने आप को रोक नही पाए औऱ मैदान में उतरकर जमकर चौके-छक्के लगाए।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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