किस दिग्गज नेता ने कहा- “राहुल गांधी मुझे मानसिक रूप से थोड़े गड़बड़ लगते हैं”

किस दिग्गज नेता ने कहा- “राहुल गांधी मुझे मानसिक रूप से थोड़े गड़बड़ लगते हैं”

ग्वालियर/अतुल सक्सेना

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि मुझे वे मानसिक रूप से थोड़े गड़बड़ लगते हैं उन्हें सीरियस लेने कि जरूरत नहीं है।

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के छोटे भाई अजय प्रताप सिंह के निधन पर शोक प्रकट करने ग्वालियर आये भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय से जब पत्रकारों ने राहुल गांधी के उस ट्वीट पर प्रतिक्रिया जाननी चाही जिसमें राहुल ने कहा था कि फरवरी में मोदी जी ने नमस्ते ट्रंप किया, मार्च में मप्र की सरकार खरीद फरोख्त कर गिराई और अब जुलाई में राजस्थान में भी यही प्रयास किया। इधर जनता कोरोना से लड़ाई लड़ रही है उधर मोदी जी को अपनी चिंता है जनता की चिंता नहीं हैं। पत्रकारों का सवाल सुनने के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि राहुल गांधी दो तीन महीने में अज्ञात रूप से विदेश जाते हैं उसके बाद जब वे लौटते हैं तो फ्रेश हो जाते हैं। वे बहुत समय से विदेश नहीं गए जो उनकी गुप्त यात्राएँ होती हैं वो नहीं हुई इसलिए मुझे वे मानसिक रूप से थोड़ा गड़बड़ लगते हैं। इसलिए इस प्रकार के प्रश्न वो पूछते रहते हैं। मैं नहीं समझता कि कोई भी ऐसे प्रश्नों को गंभीरता से लेता होगा। आप भी इसे गंभीरता से नहीं लें मैं भी नहीं लेता।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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