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हिमाचल अध्ययन में बड़ा खुलासा, 62% छोटे बच्चों के दांतों में सड़न, खानपान और मीठे स्नैक्स मुख्य कारण

Written by:Neha Sharma
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हिमाचल प्रदेश डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल, शिमला की टीम द्वारा किए गए एक अध्ययन में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। तीन से पांच साल की आयु के 62 प्रतिशत बच्चों के दांतों में सड़न पाई गई है।
हिमाचल अध्ययन में बड़ा खुलासा, 62% छोटे बच्चों के दांतों में सड़न, खानपान और मीठे स्नैक्स मुख्य कारण

हिमाचल प्रदेश डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल, शिमला की टीम द्वारा किए गए एक अध्ययन में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। तीन से पांच साल की आयु के 62 प्रतिशत बच्चों के दांतों में सड़न पाई गई है। अध्ययन के लिए शिमला जिले में 1224 बच्चों की जांच की गई। इसमें तीन साल की उम्र के बच्चों में 57 प्रतिशत, चार साल की उम्र में 65 प्रतिशत और पांच साल की उम्र तक यह आंकड़ा 70 प्रतिशत तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में यह बच्चों की सेहत के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकती है।

डॉक्टरों के अनुसार दांतों की सड़न केवल मुंह तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर की सेहत पर असर डालती है। जब बच्चे दर्द या कैविटी की वजह से सही तरीके से खाना नहीं खा पाते तो उन्हें आवश्यक पोषण नहीं मिल पाता। लगातार संक्रमण और दर्द उनकी नींद को प्रभावित करते हैं और कई बार उन्हें अस्पताल तक ले जाना पड़ता है। दूध के दांतों की यह समस्या भविष्य में स्थायी दांतों को भी नुकसान पहुंचाती है। यानी फिलहाल मामूली लगने वाली यह समस्या बच्चों के स्वास्थ्य के लिए दीर्घकालिक खतरा है।

हिमाचल अध्ययन में बड़ा खुलासा

अध्ययन हिमाचल प्रदेश डेंटल कॉलेज के बाल एवं निवारक दंत चिकित्सा विभाग की टीम ने किया। इसमें प्रोफेसर डॉ. सीमा ठाकुर, सहायक प्रोफेसर डॉ. रीतिका शर्मा, डॉ. पारुल सिंघल और डॉ. दीपक चौहान शामिल रहे। शोध के अनुसार दांतों की सड़न, जिसे वैज्ञानिक भाषा में अर्ली चाइल्डहुड कैरीज (इसीसी) कहा जाता है, का मुख्य कारण बार-बार मीठी चीजें खाना है। चॉकलेट, बिस्कुट, पैक्ड जूस और स्नैक्स से दांतों पर बैक्टीरिया एसिड बनाते हैं, जो एनामेल को कमजोर कर कैविटी पैदा करते हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया कि लंबे समय तक या रातभर बोतल से दूध पीने वाले बच्चों में सड़न की समस्या अधिक होती है, क्योंकि दूध में मौजूद शर्करा दांतों पर जमा रह जाती है।

रोचक तथ्य यह भी सामने आया कि गरीब परिवारों की तुलना में आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों के बच्चों में दांतों की सड़न की समस्या अधिक थी। इसका कारण यह है कि इन बच्चों को बार-बार मीठे और पैक्ड खाद्य पदार्थ आसानी से उपलब्ध रहते हैं। जो बच्चे दिनभर स्नैक्स खाते थे, उनमें दांतों की समस्या ज्यादा पाई गई। अध्ययन ने यह भी उजागर किया कि बड़ी संख्या में माता-पिता दंत स्वास्थ्य को लेकर जागरूक नहीं हैं। केवल आठ प्रतिशत माता-पिता को जानकारी थी कि बच्चे का पहला दंत परीक्षण एक साल की उम्र तक कराना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में नियमित ब्रश करने की आदत डालना और मीठे पदार्थों की मात्रा पर नियंत्रण करना बेहद जरूरी है।

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