
हिमाचल प्रदेश में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। यह विवाद मुख्य रूप से कृषि और बागवानी विश्वविद्यालयों में कुलपति की नियुक्तियों को लेकर सामने आया है। इसके अलावा, पिछले साल से अब तक कई अहम विधेयक भी राजभवन में लंबित हैं, जिस पर सरकार नाराजगी जता चुकी है। हाल ही में नशा मुक्ति केंद्र बनाने को लेकर भी राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच बयानबाजी हुई थी। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा था कि राज्यपाल को अपने पद की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। वहीं, अब विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर की नियुक्ति पर दोनों पक्ष खुलकर आमने-सामने आ चुके हैं।
हिमाचल में राज्यपाल-सरकार टकराव गहराया
पिछले सप्ताह प्रदेश सरकार ने डॉ. वाई.एस. परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री और सीएसके हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर में कुलपति चयन से संबंधित विज्ञापनों को रद्द कर दिया था। इसके जवाब में राज्यपाल ने अपने वैधानिक अधिकारों का हवाला देते हुए इन विज्ञापनों को फिर से बहाल कर दिया और आवेदन की अंतिम तिथि 18 अगस्त तक बढ़ा दी। सरकार और राजभवन के इस टकराव के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। कुछ प्रोफेसरों की याचिका पर कोर्ट ने फिलहाल राज्यपाल द्वारा बढ़ाई गई तिथि पर रोक लगा दी है। अब अगली सुनवाई का इंतजार है, जिससे तय होगा कि इन विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति की प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि वे राज्यपाल का सम्मान करते हैं, लेकिन विश्वविद्यालयों से जुड़ी नियुक्तियों और विधेयकों के मुद्दों पर बातचीत जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को दी गई शक्तियां संवैधानिक नहीं बल्कि सरकार द्वारा दी गई हैं, इसलिए राज्य सरकार के आदेशों का पालन होना चाहिए। सीएम ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने राज्यपाल के सामने गलत तथ्यों को रखा है। उन्होंने याद दिलाया कि राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख जरूर हैं, लेकिन उन्हें राज्य सरकार की सलाह के अनुसार ही कार्य करना चाहिए।
राज्य सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि कुल 15 अहम विधेयक राजभवन में लंबित पड़े हैं। इनमें भ्रष्टाचार पर रोक, सुखाश्रय, विश्वविद्यालय संशोधन, चाइल्ड मैरिज रोकथाम, पुलिस संशोधन और संगठित अपराध रोकथाम जैसे बड़े बिल शामिल हैं। इसके अलावा मंत्रियों व विधायकों के भत्ते और पेंशन से जुड़े विधेयक भी अटके हुए हैं। सरकार का मानना है कि इन विधेयकों पर लगातार देरी प्रदेश के विकास और प्रशासनिक कामकाज को प्रभावित कर रही है। आने वाले दिनों में यह टकराव और गहराने की संभावना है, क्योंकि दोनों ही पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे।
