हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी अपने संगठन को ज्यादा एक्टिव बनाने के लिए नया सिस्टम लागू करने जा रही है। यह पहल राहुल गांधी के निर्देशों पर शुरू की जा रही है, जिसमें ब्लॉक और जिला स्तर के नेताओं के काम का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा। दरअसल इस नए सिस्टम में पार्टी पदाधिकारियों की परफॉर्मेंस को तीन कैटेगरी में बांटा जाएग जिसमे ग्रीन, येलो और रेड जोन शामिल है।
दरअसल ग्रीन जोन में वे नेता होंगे जो संगठन के लिए अच्छा काम कर रहे हैं। येलो जोन में औसत प्रदर्शन करने वाले नेता होंगे, जबकि रेड जोन में वे लोग रखे जाएंगे जिनका काम कमजोर माना जाएगा। रेड जोन में आने वाले नेताओं को अपने प्रदर्शन में सुधार करना होगा, नहीं तो उन्हें पद छोड़ना पड़ सकता है।
जानिए कैसे होगी नेताओं की निगरानी?
वहीं पार्टी इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए एक खास मोबाइल ऐप तैयार कर रही है। इस ऐप के जरिए ब्लॉक अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष और राज्य कार्यकारिणी के पदाधिकारी अपनी गतिविधियों की जानकारी अपलोड करेंगे। इसमें मीटिंग, कार्यक्रम, जनसंपर्क और संगठन से जुड़ी गतिविधियों की फोटो और रिपोर्ट डालनी होगी। दरअसल इस डिजिटल सिस्टम का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कौन नेता जमीन पर कितना काम कर रहा है। इससे पार्टी नेतृत्व को यह समझने में आसानी होगी कि संगठन को मजबूत करने में किसका योगदान ज्यादा है।
जानकारी के मुताबिक हर तीन महीने में इन गतिविधियों की समीक्षा होगी। दरअसल हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी दोनों स्तरों पर इस काम की निगरानी की जाएगी। अगर किसी नेता का प्रदर्शन लगातार कमजोर रहता है तो उसे पहले सुधार का मौका दिया जाएगा। इसके बाद भी स्थिति नहीं बदली तो उसे पद से हटाया जा सकता है।
अच्छा काम करने वालों को मिलेगा बड़ा मौका
दरअसल इस नई व्यवस्था का एक अहम पहलू यह भी है कि अच्छा प्रदर्शन करने वाले नेताओं को भविष्य में चुनावी टिकट देने में प्राथमिकता मिल सकती है। ग्रीन जोन में आने वाले पदाधिकारियों को लोकसभा, राज्यसभा या विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना ज्यादा होगी। वहीं इसके अलावा ऐसे नेताओं को संगठन में भी बड़े पद दिए जा सकते हैं। पार्टी का मानना है कि इससे नेताओं में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और वे ज्यादा सक्रिय होकर काम करेंगे। पार्टी इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर पर कंट्रोल रूम भी बनाएगी। यहां से पूरे सिस्टम पर नजर रखी जाएगी।






