हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा और भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की मुलाकात ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। दरअसल इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने भारत के लोकतंत्र, शांति और आध्यात्मिक परंपरा पर चर्चा की। दलाई लामा ने भारत के प्रति गहरा आभार जताते हुए कहा कि पिछले कई दशकों से उन्हें यहां खुलकर जीने और अपने विचार रखने की आजादी मिली है।
दरअसल धर्मशाला स्थित अपने निवास पर हुई इस मुलाकात में दलाई लामा ने भारत की धार्मिक विविधता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को दुनिया के लिए प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि भारत ऐसा देश है जहां अलग-अलग धर्म और संस्कृतियां साथ-साथ रहकर समाज को मजबूत बनाती हैं। दलाई लामा पिछले लगभग 67 वर्षों से भारत में रह रहे हैं और उन्होंने यहां की संस्कृति और लोकतांत्रिक माहौल को करीब से देखा है। उन्होंने कहा कि भारत ने उन्हें हमेशा सम्मान और सुरक्षा दी है, इसलिए वे इस देश को अपना दूसरा घर मानते हैं।
दलाई लामा ने भारतीय लोकतंत्र को बताया दुनिया के लिए मिसाल
वहीं इस मुलाकात के दौरान दलाई लामा ने भारत के लोकतंत्र की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत में विचारों की आजादी और अलग-अलग मान्यताओं को सम्मान देने की परंपरा दुनिया के कई देशों के लिए एक उदाहरण है। उनके मुताबिक भारत की असली ताकत इसकी विविधता है, जहां अलग-अलग समुदाय और धर्म एक साथ रहते हैं।
इसके साथ ही पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी इस मुलाकात को बेहद खास बताया। उन्होंने कहा कि दलाई लामा जैसे महान आध्यात्मिक नेता से मिलना उनके लिए एक यादगार अनुभव रहा। धनखड़ ने कहा कि दलाई लामा करुणा, शांति और मानवीय मूल्यों का प्रतीक हैं और उनकी मौजूदगी भारत की आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत करती है। दरअसल इस दौरान धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
धर्मशाला में तिब्बती समुदाय और प्रशासनिक मुद्दों पर भी हुई चर्चा
वहीं इसी दौरान दलाई लामा से भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी विवेक कुमार ने भी मुलाकात की। वे भारत सरकार में वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत हैं। धर्मशाला में हुई इस शिष्टाचार भेंट के दौरान आध्यात्मिक बातचीत के साथ-साथ तिब्बती समुदाय से जुड़े कुछ प्रशासनिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। जानकारी के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में रह रहे तिब्बती समुदाय की कुछ बस्तियों से जुड़े जमीन और वन भूमि के मामलों पर लंबे समय से समाधान लंबित है। इस संबंध में एक आधिकारिक आवेदन भी सौंपा गया जिसमें तिब्बती बस्तियों के भूमि उपयोग और वन विभाग के नियमों के बीच आने वाली दिक्कतों का जिक्र किया गया है।
धर्मशाला पिछले कई दशकों से तिब्बती समुदाय का अहम केंद्र रहा है। यहां दलाई लामा का निवास होने के कारण दुनिया भर से लोग यहां आध्यात्मिक मार्गदर्शन लेने आते हैं।






