हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सरकार ने बताया है कि राज्य में ड्यूटी पर नहीं लौटने वाले 19 डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। यह मामला उन 45 डॉक्टरों से जुड़ा है जिन्होंने एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक के बावजूद अपनी निर्धारित पोस्टिंग पर ड्यूटी ज्वाइन नहीं की थी। इनमें से 26 डॉक्टर अब तैनाती दे चुके हैं। हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन्न चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की और अगली सुनवाई 8 सितंबर को तय की है।
ड्यूटी न ज्वाइन करने वाले 19 डॉक्टरों को नोटिस
इससे पहले 6 जून को हाईकोर्ट ने बॉन्ड शर्तों से बचने की कोशिश कर रहे डॉक्टरों पर कड़ा रुख अपनाया था। इन डॉक्टरों ने 24 जनवरी 2022 को 40 लाख रुपये का बॉन्ड भरा था, जिसके अनुसार पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स के बाद उन्हें हिमाचल प्रदेश में दो वर्षों तक सेवा देनी थी। इस दौरान उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित स्टाइपेंड भी दिया गया था। लेकिन बाद में उन्होंने ड्यूटी पर लौटने से इनकार करते हुए बॉन्ड की वैधता को ही चुनौती दी।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि सरकार को एक माह के भीतर पोस्टिंग आदेश जारी करने थे, जबकि सरकार ने 10 अप्रैल 2025 को आदेश जारी किए, जो कि तय समयसीमा से बाद में थे। इसलिए बॉन्ड की शर्तें लागू नहीं होनी चाहिए। इस पर हाईकोर्ट ने एकल न्यायाधीश के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें डॉक्टरों को एमबीबीएस डिग्री और बिना तारीख के दिए गए चेक वापस करने के निर्देश दिए गए थे।
हालांकि, अदालत ने देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के एकल न्यायाधीश के निर्देश को बरकरार रखा। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिकाकर्ताओं की अपील को खारिज कर दिया, जिससे अब राज्य सरकार के आदेश प्रभावी हो गए हैं। यह मामला मेडिकल शिक्षा और सेवा अनुशासन के संदर्भ में पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।





