हिमाचल प्रदेश में नगर निकाय चुनावों से पहले ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) को प्रतिनिधित्व देने की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ा दिया है। शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने मंगलवार को चौड़ा मैदान में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि सरकार ओबीसी आरक्षण के लिए एक आयोग गठित करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सही संख्या का पता लगाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नगर निकाय चुनाव करवाए जाएंगे। इसके लिए शहरी विकास विभाग ने राज्य निर्वाचन आयोग को औपचारिक पत्र भी भेज दिया है।
विक्रमादित्य सिंह का बड़ा ऐलान
मंत्री ने बताया कि प्रदेश में सात नगर निगम, 29 नगर परिषद और 37 नगर पंचायतों के चुनाव होने हैं। इनमें शिमला को छोड़कर धर्मशाला, मंडी, सोलन, पालमपुर, ऊना, हमीरपुर और बद्दी नगर निगमों में मतदान होना है। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि हर वर्ग को समान अवसर मिले और स्थानीय निकायों में ओबीसी समुदाय को भी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
इसके साथ ही मंत्री ने प्रदेश में हाल में आई प्राकृतिक आपदा से मिली सीख पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिजली महादेव रोप-वे के साथ-साथ श्रीखंड, चूड़धार और श्राईकोटी जैसे धार्मिक क्षेत्रों में सीमित रूप से पर्यटन को बढ़ावा देना जरूरी है, लेकिन इसमें स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है, मगर देवभूमि की “देव नीति” और समाज की आस्थाओं से समझौता नहीं होना चाहिए।
सड़कों की खराब स्थिति पर सख्त निर्देश
सड़कों की खराब स्थिति को लेकर विक्रमादित्य सिंह ने विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सड़कों की गुणवत्ता पर लगातार शिकायतें मिल रही हैं, इसलिए क्वालिटी कंट्रोल विंग को औचक निरीक्षण करने के आदेश दिए गए हैं। मंत्री ने चेतावनी दी कि अगर टारिंग या मेटलिंग में गड़बड़ी पाई गई तो संबंधित अधिकारी और ठेकेदार, दोनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार विकास और पारदर्शिता के साथ काम कर रही है। ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नगर निकाय चुनाव निष्पक्ष और प्रतिनिधिक ढंग से करवाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार संतुलित दृष्टिकोण अपनाएगी ताकि हिमाचल की परंपरा और प्रगति दोनों सुरक्षित रहें।





