
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में साल 2025 के मॉनसून सीजन ने एक बार फिर सालों पुरानी आपदाओं की भयावह यादें ताजा कर दी हैं। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण जिले में अब तक लगभग एक हजार घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। इसके साथ ही दर्जनों सड़कों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है। जिला प्रशासन लगातार राहत और बचाव कार्यों में जुटा हुआ है, लेकिन खराब मौसम और लगातार भूस्खलन चुनौती बना हुआ है।
200 करोड़ का नुकसान
सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक है चंडीगढ़-कीरतपुर-मनाली नेशनल हाईवे, जहां मंडी से लेकर मनाली तक का सफर अब जोखिम भरा हो गया है। नेशनल हाईवे पर कई जगहों पर पहाड़ी से मलबा गिर रहा है और बार-बार लैंडस्लाइड हो रहे हैं। इस हाईवे को संभालने वाली नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को अब तक लगभग 200 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
एनएचएआई प्रोजेक्ट डायरेक्टर वरुण चारी ने जानकारी दी कि मंडी से औट के बीच का हिस्सा सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। इस क्षेत्र में हुए नुकसान का आकलन पुणे की एक कंपनी द्वारा किया जा रहा है, जो तकनीकी रूप से यह भी जांचेगी कि इस क्षेत्र में बार-बार लैंडस्लाइड क्यों हो रहे हैं। इसका मकसद भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचने के लिए स्थायी तकनीकी समाधान ढूंढना है, जिससे सड़कें सुरक्षित रह सकें और जनहानि न हो।
विशेष रूप से मंडी के चार मील से औट तक के हिस्से में भूस्खलन की घटनाएं लगातार जारी हैं। कई जगहों पर सड़कों को सहारा देने वाले डंगे पूरी तरह गिर चुके हैं या उनमें बड़ी दरारें आ चुकी हैं, जो किसी भी वक्त नई दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं। पंडोह के कैंची मोड़ के पास एक बार फिर हाईवे का हिस्सा धंस गया है। इस मार्ग पर पिछले वर्षों में कई लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि इस विनाश की ज़िम्मेदारी किसकी है और कब तक ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज किया जाएगा?
