हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सोमवार से निजी बस ऑपरेटरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो गई है। हड़ताल के पहले ही दिन शहर में कोई भी निजी बस नहीं चली, जिससे आम लोगों, स्कूल-कॉलेज के छात्रों और दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। सुबह के समय हजारों लोग बसों की अनुपलब्धता के कारण फंसे रहे। करीब 10 बजे तक सभी निजी बसें परिवहन विभाग के आरटीओ कार्यालय के बाहर खड़ी कर दी गईं, जहां चालक और परिचालक संघ के सदस्य अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज करा रहे हैं।
बस ऑपरेटरों की हड़ताल शुरू
निजी बस ऑपरेटरों का कहना है कि शिमला शहर में एचआरटीसी (हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन) की लंबी दूरी की बसों के प्रवेश से जाम की समस्या बढ़ रही है और इसका सीधा असर लोकल बस रूटों पर पड़ता है। उनका आरोप है कि सरकार और प्रशासन की नीतियां निजी बस संचालकों के हितों के खिलाफ हैं। दूसरी ओर, एचआरटीसी ड्राइवर-कंडक्टर यूनियन के प्रवक्ता पदम सिंह ठाकुर ने कहा कि उनकी बसों की वजह से ट्रैफिक जाम नहीं लगता और निजी बस चालकों से उनका कोई मतभेद नहीं है।
शिमला सिटी प्राइवेट बस चालक-परिचालक संघ ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। उनका प्रमुख विरोध इस बात को लेकर है कि 40 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने वाली बसों को शहर में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है। संघ का कहना है कि इससे लोकल ट्रैफिक प्रभावित हो रहा है और ओल्ड बस स्टैंड में लंबी दूरी की बसों के आने से अव्यवस्था बढ़ रही है। उन्होंने सरकार से तुरंत इस नीति की समीक्षा करने की मांग की है।
विभाग के नए रूटों पर बवाल
उधर, परिवहन विभाग के अनुसार, एचआरटीसी ने 18 नए रूटों की सूची जारी की है ताकि यात्रियों को आंशिक राहत दी जा सके। हालांकि निजी बस ऑपरेटरों ने इस सूची को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि सूची में शामिल कई बसें लंबे समय से बंद हैं, जबकि कुछ बसें अन्य डिपो से चलकर शिमला आती हैं और लोकल रूट पर भेजी जाती हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था न केवल अनुचित है, बल्कि स्थानीय बस संचालकों के रोजगार को भी प्रभावित कर रही है।
गौरतलब है कि शिमला शहर में करीब 106 निजी बसें नियमित रूप से चलती हैं, जिनमें प्रतिदिन हजारों यात्री सफर करते हैं। इनके बंद रहने से सोमवार को शहर में सार्वजनिक आवागमन ठप पड़ गया। आम यात्रियों को मजबूरन टैक्सी, ऑटो या साझा सवारी वाहनों का सहारा लेना पड़ा। हड़ताल से शिक्षा संस्थानों और सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति भी प्रभावित हुई है।





