हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में पिछले सात दिनों से चली आ रही सफाई कर्मचारियों की हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई है। दरअसल शहर में फैली गंदगी और अस्त-व्यस्त सफाई व्यवस्था से परेशान नागरिकों और प्रशासन के लिए यह एक महत्वपूर्ण राहत भरी खबर है। मेयर सुरेंद्र चौहान द्वारा कर्मचारियों की मांगों को मानते हुए 10 प्रतिशत मानदेय बढ़ोतरी का आश्वासन दिए जाने के बाद सैहब सोसायटी के तहत कार्यरत कर्मचारियों ने अपना आंदोलन खत्म करने का फैसला लिया है। अब कर्मचारी शुक्रवार से एक बार फिर डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का काम शुरू करेंगे, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था पटरी पर लौटने की उम्मीद है।
वहीं इस समझौते में एक और अहम बिंदु यह रहा है कि नगर निगम प्रशासन ने हड़ताल के दौरान बर्खास्त किए गए 41 कर्मचारियों को बहाल करने का भी भरोसा दिया है। दरअसल, बुधवार को जब कर्मचारी काम पर नहीं लौटे थे, तब निगम प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए इन 41 सफाई कर्मचारियों को टर्मिनेट करने के आदेश जारी किए थे। उस समय प्रशासन ने इनकी जगह आउटसोर्स आधार पर नए कर्मचारी रखने का निर्णय लिया था, ताकि सफाई व्यवस्था को बहाल किया जा सके। हालांकि, अब हड़ताल समाप्त होने और मेयर के आश्वासन के बाद इन बर्खास्त किए गए कर्मचारियों की बहाली का रास्ता साफ हो गया है, जो कर्मचारियों के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है।
जमा हुए कूड़े के ढेर को हटाने का काम शुरू
वहीं हड़ताल खत्म होने के साथ ही शहर में पिछले सात दिनों से जमा हुए कूड़े के ढेर को हटाने का काम भी तत्काल प्रभाव से शुरू होगा। ‘क्लीन एंड ग्रीन शिमला’ योजना के तहत आने वाले विभिन्न इलाकों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए थे, जिससे न केवल शहर की सुंदरता प्रभावित हो रही थी, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ गई थीं। सफाई व्यवस्था ठप होने से बाजारों, गलियों, रिहायशी क्षेत्रों और पर्यटन स्थलों पर हालात बेहद खराब हो गए थे, जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अब इन सभी समस्याओं से जल्द ही निजात मिलने की उम्मीद है।
इसे लेकर नाराज थे कर्मचारी
दरअसल कर्मचारी मुख्य रूप से 10 प्रतिशत मानदेय बढ़ोतरी रोकने के नगर निगम के फैसले से नाराज थे। इसी मुद्दे को लेकर वे सीटू (CITU) के बैनर तले आंदोलन कर रहे थे। इस हड़ताल के दौरान जिला प्रशासन ने आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) भी लागू किया था, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को काम पर लौटने के लिए मजबूर करना था, लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों पर डटे रहे और आंदोलन जारी रखा। कर्मचारियों ने अपने आंदोलन को और उग्र करने की चेतावनी दी थी, जिसमें राजभवन और सचिवालय मार्च के साथ-साथ जेल भरो आंदोलन की धमकी भी शामिल थी, जिससे प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ रहा था।
इस हड़ताल का असर पूरे शिमला शहर पर साफ दिखाई दिया। करीब 32 किलोमीटर क्षेत्र में फैले शहर में हर जगह कूड़े के ढेर जमा हो गए थे, जिससे न केवल बदबू फैल रही थी, बल्कि आवारा कुत्तों और बंदरों की समस्या भी काफी बढ़ गई थी। पर्यटन सीजन के बीच फैली इस गंदगी से स्थानीय कारोबारियों और पर्यटकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, जिससे शहर की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था। अब हड़ताल समाप्त होने और नगर निगम प्रशासन तथा कर्मचारियों के बीच सहमति बनने से शहर की सफाई व्यवस्था एक बार फिर से पटरी पर लौट सकेगी, जिससे सभी को राहत मिलेगी।






