गंगा दशहरा पर बड़ा हादसा, नर्मदा में एक ही परिवार के पांच लोग डूबे

नर्मदा

होशंगाबाद। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के होशंगाबाद (Hoshangabad) में गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) पर नर्मदा नदी (Narmada) में स्नान करने पहुंचे एक ही परिवार के पांच लोग डूब गए| एक का शव मिला है| जबकि एक महिला और एक बच्ची को सुरक्षित निकाल लिया गया है| वहीं दो बच्चों की तलाश जारी है| एनडीआरएफ की रेस्क्यू टीम लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई है|

प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार को गंगा दशहरा होने के चलते स्नान के लिए विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। लोग स्नान करने के बाद दान-दक्षिणा वहां करते हैं। सेठानी घाट बंद होने के कारण कुछ लोग बांद्राभान फोरलेन के पास नर्मदा नदी में स्नान करने पहुंच गए। जिले के रायपुर गांव निवासी एक परिवार के 5 सदस्य भी अपने वाहन से दोपहर करीब 12 बजे स्नान करने पहुंचे। तभी यह हादसा हुआ|

डूब रहे परिवार के सदस्यों के चिल्लाने पर दो लोगों को किसी तरह बचाया जा सका| जबकि एक का शव मिल चुका है| अन्य की तलाश जारी है। गंभीर हालत में एक महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आदि (13) जब तेज बहाव में बहने लगा तो उसे बचाने आयुष (16) आगे बढ़ा और वह भी बह गया। इस बीच परिवार के अन्य सदस्यों ने दोनों बालकों को बहते देखा तो वे उन्हें बचाने के लिए तेज बहाव में गहरे पानी में चले गए और बह गए। घाट पर स्नान कर रहे अन्य ग्रामीणों ने कूदकर एक महिला वैशाली (40) और एक 13 साल की सिद्धी नाम की बच्ची को बाहर निकाला। थोड़ी दूर पर निमेश (35) का शव मिला। आयुष और आदि का अभी पता नहीं चल पाया है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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