शिवराज सरकार के 100 दिन पुरे, कांग्रेस ने मनाया काला दिवस

शिवराज सरकार के 100 दिन पुरे, कांग्रेस ने मनाया काला दिवस

इंदौर। आकाश धोलपुरे

मध्यप्रदेश में बीजेपी सरकार के 100 दिन होने पर जहाँ बीजेपी मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारियों में जुटी हुई है वही इसके उलट प्रदेश में धोखे से और खरीद फरोख्त कर सरकार बनाने के आरोप लगाकर कांग्रेस आज का दिन काला दिवस के रूप में मना रही है। इंदौर में पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने जहां एक दिन पहले बीजेपी पर सोशल हमला बोलकर लोकतंत्र का हत्यारा बताते हुए सीधा आरोप लगाकर आज का दिन काला दिन के रूप के मनाने का एलान किया था वही आज सड़क पर उतरकर इंदौर में कांग्रेसियों ने काले कपड़े पहनकर बीजेपी को काला झंडा भी दिखाया। इंदौर में शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विनय बाकलीवाल के नेतृत्व ने कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं ने झांझ – मंझीरे बजाकर रघुपति राघव राजा राम गाया और बीजेपी को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की। इंदौर सहित प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी विरोधस्वरूप काला दिवस मनाने का दावा कांग्रेस द्वारा किया गया। इंदौर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विनय बाकलीवाल ने बीजेपी की शिवराज सरकार पर कोरोना को रोकने में नाकाम सरकार बताया और कहा इस वक्त गरीबो और किसानों के प्रति सरकार का बर्ताव बुरा है वही उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार के वक्त बिजली के बिल जहां 100 रुपए आते थे वही अब बिल 3 से 4 हजार रुपए आ रहे है। इधर, पेट्रोल – डीजल की मूल्यवृद्धि के दौरान मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा इन पर टैक्स वसूली करने का आरोप लगाया गया है और कांग्रेस ने ये भी कहा कि आम आदमी बीजेपी सरकार से त्रस्त हो चुका है और आगामी उपचुनाव में बढ़ती महंगाई और नाकाम सरकार को जनता जबाव देगी।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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