जनता के बीच पहुंचे मंत्री सिलावट, सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर उडी धज्जियां

जनता के बीच पहुंचे मंत्री सिलावट, सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर उडी धज्जियां

 इंदौर| आकाश धोलपुरे| मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के जल संसाधन और इंदौर के प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट (Tulsi Silavat) गुरुवार को सांवेर विधानसभा पहुंचे जहां उन्होंने सांवेर की जनता की भलाई और विकास के लिए ताल ठोककर अधिकारियों को भी तमाम दिशानिर्देश जनता के ही सामने दे डाले। अफसरों को निर्देश देने वाले मंत्री खुद नियम का पालन करना भूल गए| इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियाँ उड़ाई गई|

दरअसल, बुधवार को मंत्री सिलावट ने इंदौर में दावा किया था की वो प्रदेश में कोरोना के खिलाफ सबसे पहले जागृत हुए थे लेकिन अचानक आज मंत्री जी की सद्बुद्धि पर सवाल इसलिये उठ खड़े हुए क्योंकि पूरे लाव लश्कर के साथ वो न सिर्फ सांवेर पहुंचे बल्कि उन्होंने स्वयं सोशल डिस्टेसिंग की धज्जियां उड़ाई। इंदौर सांसद शंकर लालवानी और विधायक रमेश मेंदोला के साथ सांवेर में विकास कार्यो के अवलोकन के दौरान मंत्री सिलावट ने अपने ही सामने सोशल डिस्टेसिंग की धज्जियां तो उड़ते ही देखी साथ ही न तो उन्होंने किसी कागज और न तो किसी व्यक्ति को छूते समय सेनेटाइजर का तुरंत इस्तेमाल किया।

बता दे कि देशभर में इंदौर कोरोना संक्रमित टॉप 10 शहरों की सूची में शामिल है और ये भी बता दें कि मंत्रीजी ने खुद जो कल दावा किया था कि उन पर आरोप लगाने वाले ये संज्ञान ले ले कि वो प्रदेश में सरकार के अंग है और वो प्रदेश की बीजेपी सरकार के मंत्री भी है। उन्होंने ये भी बताया था कि प्रदेश और देश मे बीजेपी की सरकार है और आज उन्होंने ये साबित भी कर दिया। कोरोना से वैसे भी इंदौर के बुरे हाल है ऐसे में मंत्री तुलसी सिलावट की गर्मजोशी अब स्वयं बीजेपी सरकार और सीएम को कठघरे में खड़ी कर रही है। जहां बीते 2 माह से आम जनता अपने घरों में दुबक कर सरकार और प्रशासन के हर निर्देशो का पालन कर रही है तो दूसरी तरफ मंत्री ही सोशल डिस्टेसिंग और पीएम मोदी के मिशन कोरोना की धज्जियां उड़ाने पर आतुर है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा ये भी है कि प्रेमचंद गुड्डू के द्वारा दी गई सीधी चुनौती के बाद मंत्री सिलावट ने हड़बड़ाहट में ऐसा कदम उठा लिया जो लोगो की जान पर भी भारी पड़ सकता है। मंत्री सिलावट ने तो बकायदा अपने एक समर्थक की पीठ थप थपा कर ये भी जता दिया कि अब उन्हें किसी महामारी की नही बल्कि उपचुनाव की चिंता सता रही है और ये ही वजह है कि उन्हें न तो अब जनता की जान की परवाह है और ना ही किसी गाइडलाइन की।

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