Indore News : इंदौर में बड़ा राशन घोटाला उजागर, खाद्य अधिकारी निलंबित, 31 पर FIR

INDORE

इंदौर, आकाश धोलपुरे। मध्यप्रदेश (MP) के इंदौर (Indore) में कलेक्टर मनीष सिंह (Collector Manish Singh) ने एक बड़े राशन घोटाला (Ration Scam) का पर्दाफाश किया है। इंदौर कलेक्टर (Indore Collector) ने 12 राशन दुकानों से लगभग 51 हजार गरीब परिवारों का करीब 80 लाख का राशन घोटाले  उजागर किया है। लापरवाही के चलते इंदौर कलेक्टर खाद्य अधिकारी आरसी मीणा (Food Officer RC Meena) को निलंबित (Suspended) कर दिया है और  एफआईआर (FIR) दर्ज करने की बात कही है।भारत दवे श्याम दवे प्रमोद दहीगुडे सहित 31 लोगों पर विभिन्न थानों में एफआईआर दर्ज कराई गई है।

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दरअसल, इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने आज मंगलवार को मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें लगातार जिले की पीडीएस दुकानों से खाद्यान्न कम और वितरण नहीं होने की सूचना मिल रही थी, जिसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर 12 जनवरी को जांच दलों ने एक दर्जन से अधिक दुकानों पर छापामार कार्रवाई की और 80 लाख के इस घोटाले का पर्दाफाश किया। करीब ढाई लाख किलो से ज्यादा 51 हजार से अधिक गरीबो का राशन माफियाओं (Ration mafia) द्वारा हड़पा गया है।

कलेक्टर ने बताया कि इस मामले में भरत दवे, श्याम दवे और प्रमोद दहिगुडे के खिलाफ रासुका की कार्यवाही होगी । वही अनियमितता पाए जाने पर सम्पत्ति भी जब्त होगी ।इस मामले में निलंबित खाद्य अधिकारी आरसी मीणा के खिलाफ भी एफआईआर की जाएगी। अलग-अलग 5 स्थानों पर मामले में एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है। आरोपियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 5/7 आईपीसी, 420 और राशन में अमानत में खयानत की धारा 409 और 120 बी के तहत मामला दर्ज होगा  ।

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जांच दल द्वारा 12 उचित मूल्य दुकानों के निरीक्षण के दौरान 185625 किलो गेहूं, 69855 किलो चावल, नमक 3169 किलो, शक्कर 423 किलो, चना दाल 2201 किलो, साबुत चना 1025 किलो, तुअरदाल 472 किलो, केरोसीन 4050.5 लीटर के रिकार्ड में गड़बड़ी पायी गयी। इस तरह राशन माफियाओं ने कुल 255480 किलो खाद्यान्न का गबन कर 79 लाख 4 हजार 479 रूपये का आर्थिक घोटाला किया गया। इस तरह राशन माफियाओं ने 51096 हितग्राहियों को राशन से वंचित किया।

बता दे कि कोरोना काल मे प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (Prime Minister’s poor welfare scheme) और मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना (Chief Minister Annapurna Yojana) चलाई थी, जिसके तहत अप्रैल से नवंबर तक ये राशन वितरित किया जाना था। हालांकि यह पहला मौका नही है, इससे पहले महू, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर से बड़े घोटाले उजागर हुए थे।

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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani →
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