बुजुर्गों के अपमान के मामले में 6 मस्टरकर्मी पर गाज, निगमायुक्त की रिपोर्ट में वो खुद पाक-साफ

बुजुर्गों के अपमान के मामले में 6 मस्टरकर्मी पर गाज, निगमायुक्त की रिपोर्ट में वो खुद पाक-साफ

इंदौर, आकाश धोलपुरे। इंदौर में हाल ही में बुजुर्गों के शहर निकाले को लेकर जमकर हंगामा मचा था, जिसपर कांग्रेस ने भी खूब सियासत की थी। वहीं प्रदेश सरकार ने एक अपर आयुक्त और निगम प्रशासन ने 2 निगमकर्मियों पर कार्रवाई कर अपने अलर्ट रहने का विश्वास दिलाया था। लेकिन इस मामले में अब एक नया पेंच सामने आया है जिसके बाद कई सवाल निगम की जांच पर उठ रहे हैं। दरअसल, नगर निगम की जांच रिपोर्ट में 6 और मस्टरकर्मी दोषी करार दिए गए हैं और उपायुक्त प्रताप सिंह सोलंकी की लापरवाही को घटना का बड़ा कारण बताया गया है।

दरअसल, बुजुर्गों से अभद्रता मामले की जांच रिपोर्ट निगम के अपर आयुक्त एस.कृष्ण चैतन्य ने आखिरकार आयुक्त प्रतिभा पाल को सौंप दी है। रिपोर्ट में उपायुक्त प्रताप सोलंकी को घटना के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराया गया है, साथ ही 6 और मस्टरकर्मियों को दोषी पाया गया है। रिपोर्ट की मानें तो उपायुक्त के कहने पर ही कर्मचारी डम्पर में डाल कर बुजुर्गों को शहर से बाहर लेकर गए थे। बता दें कि पूरी घटना में अपर आयुक्त द्वारा 10 से ज्यादा लोगों के बयान लिए गए थे। प्रारंभिक रूप से दोषी मानते हुए उपायुक्त प्रताप सोलंकी को निलंबित किया गया है जबकि सुपरवाइजर विश्वास वाजपेयी और ब्रजेश लश्करी को बर्खास्त कर दिया गया था।

बता दें कि बीते दिनों इंदौर में बुजुर्गों को रेन बसेरों की बजाय शिप्रा ले जाकर सड़क पर छोड़ने का मामला सामने आया था जिसके बाद शहर ही नहीं बल्कि प्रदेश के साथ पूरे देश में भी नगर निगम की साख पर बट्टा लगा था और निगम ने अपनी धूमिल हुई छवि को सुधारने के लिए दोषियों पर कार्रवाई के लिए जांच करवाई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर निगम के लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों को सेवा से हटाया जा सकता है। लेकिन अपर आयुक्त स्तर के अधिकारी से जांच कराने के लेकर पहले ही तमाम सवाल उठ रहे थे, अब इस मामले में 6 मस्टरकर्मी जितेंद्र तिवारी, अनिकेत करोने, राज परमार, गजानंद महेश्वरी, राजेश चौहान, सुनील सुरागे पर गाज गिरी है। मगर सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या निगमायुक्त प्रतिभा पाल को घटना की स्वयं जिम्मेदारी लेकर एक मिसाल पेश नहीं करनी थी। और सवाल ये भी उठ रहे हैं कि निगमायुक्त प्रतिभा पाल को क्या जांच के दायरे में लाया गया था। इसका जबाव फिलहाल किसी के पास नहीं है। ऐसे में निगमायुक्त को लेकर सवाल उठना लाजमी है क्योंकि निम्न स्तर के कर्मचारियों पर जब मुखिया का नियंत्रण नहीं है तो फिर भले ही 5 क्या 10 बार नम्बर 1 आएं, लेकिन ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को कोई नहीं रोक पायेगा।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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