पेरेंट्स मीट में डांट पड़ी तो बच्ची ने लगाई फांसी

पेरेंट्स मीट में डांट पड़ी तो बच्ची ने लगाई फांसी

आकाश धौलपुरे/इंदौर। शहर के एमआईजी थाना क्षेत्र के संजय नगर में रहने वाली एक बच्ची को पेरेन्ट मीट में डांटा जाना इतना बुरा लगा कि उसने फांसी लगाकर जान दे दी। दरअसल 10 साल की बच्ची सुबह स्कूल गई थी जब वहां पर पेरेंट्स मीट थी, पेरेंट मीट में जब उसकी कॉपियां देखी गई तो उसके नंबर बहुत अच्छे नहीं थे। जिसको लेकर टीचर ने उसकी डांट लगा दी।

डांट से नाराज बच्ची सीधी घर चली आई और उसने अपने पिता को फोन लगा दिया जो नौकरी पर गए हुए थे। पिता जब तक लौट कर आते तब तक बच्ची ने फांसी लगा ली थी। फिलहाल बच्ची का शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल में रखा गया है और स्कूल प्रबंधन से पूछताछ की जा रही है कि आखिरकार ऐसी क्या वजह थी जो बच्ची ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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