अच्छी खबर: इंदौर में बुधवार को 39 लोग घर लौटे, अब तक 200 से ज्यादा ने जीती कोरोना से जंग

अच्छी खबर: इंदौर में बुधवार को 39 लोग घर लौटे, अब तक 200 से ज्यादा ने जीती कोरोना से जंग

इंदौर/आकाश धोलपुरे

प्रदेश के इंदौर में भले ही कोरोना संकट गहराया हुआ हो लेकिन राहत की बात ये है कि अब शहर में कोरोना को हराकर घर लौटने वालो के आंकड़े भी तेजी से बढ़ रहे है। जहां मंगलवार को शहर के इंडेक्स हॉस्पिटल से 43 लोग डिस्चार्ज होकर घर लौटे थे वही लगातार दूसरे दिन बुधवार को भी लोगो के बड़ी संख्या में डिस्चार्ज होने का सिलसिला जारी रहा।

बुधवार को कोरोना को मात देकर इंदौर के अरविंदो अस्पताल से 38 लोग अपने घर लौटे, वहीं दूसरी ओर शहर के एमआरटीबी अस्पताल से 1 व्यक्ति ने कोरोना को हराकर घर वापसी की है। इसके बाद शहर में बुधवार को कुल 39 लोग स्वस्थ होकर अपने घर लौटे हैं। बता दें कि अरविंदो अस्पताल से कोरोना की जंग जीतकर घर लौटने वालो में शहर के सुदामा नगर और जेल रोड़ सहित अन्य स्थानों के लोग भी शामिल है। अरविंदो अस्पताल से ठीक होकर लौटने वालो का कहना हम भगवान को ढूंढने के लिए स्वर्ग जाने की प्रार्थना करते हैं लेकिन असल में भगवान तो डॉक्टर और नर्स के रूप में धरती पर ही मौजूद है जिनका अहसास हमें नही होता है।

खुशी की बात ये है कि कई लोग कोरोना को नियत समय के अंदर ही हराकर लौट रहे हैं। बुधवार को अरविंदो से 38 और एमआरटीबी अस्पताल से 1 कोरोना योद्धा के घर लौटने के बाद अब तक इंदौर 216 लोग कोरोना से जंग जीत चुके हैं, यानी कुल कोरोना पॉजिटिव मरीजों में से अब हर सातवां शख्स कोरोना को तेजी से हराने में कामयाब हो रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में स्वस्थ होने वाले लोगो की संख्या में तेजी से वृद्धि होने की संभावना भी स्वास्थ्य विभाग जता रहा है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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