इंदौर में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, कोरोना पॉजिटिव मरीजों के क्षेत्रों में कर रहा है स्कैनिंग

इंदौर में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, कोरोना पॉजिटिव मरीजों के क्षेत्रों में कर रहा है स्कैनिंग

इंदौर।

प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में कोरोना पॉजिटिव मरीजो की संख्या लगातार बढ़ रही है। पूरे प्रदेश के 50 प्रतिशत आंकड़े सिर्फ अकेले इंदौर शहर के है। इसी को लेकर जिला कलेक्टर इंदौर सतत नजर बनाए हुए है। वही स्वास्थ विभाग की टीम को जिन क्षेत्र में कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले है उन क्षेत्रों में घर – घर जाकर पुलिस बल के साथ स्वास्थ विभाग की टीम स्केनिग कर रही है ।

दरअसल रविवार को रानीपुरा क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा की जा रही स्केनिग में रहवासियों ने अभद्रता की थी जिसके बाद सोमवार से पुलिस बल के साथ स्वास्थ विभाग की अलग – अलग टीम स्केनिंग में जुटी हुई है। दरअसल, प्रशासन का भी फोकस 3 दिवसीय पूर्णतः बन्द के दौरान प्रभावित क्षेत्रों पर रहेगा ताकि ऐसे क्षेत्रों में संक्रमण अपनी जड़ें मजबूत ना कर सके। वही सोशल मीडिया के जरिये एक ओर कोरोना पाजीटिव मरीज की मौत को मुख्य स्वास्थ अधिकारी डॉ. प्रवीण जड़िया ने निराधार बताते हुए साफ किया कि कृपया लोग सोशल मीडिया पर अफवाह ना फैलाये। बता दे कि अकेले इंदौर की बात की जाए तो यहां कोरोना पॉजिटिव मरीजो की संख्या 27 है वही एक व्यक्ति की मौत कोरोना से हुई है। बता दें कि आंकड़ो में उज्जैन को शामिल नही किया गया है। यदि उज्जैन को शामिल करेंगे तो पॉजिटिव मरीजो की संख्या 32 और मौत का कुल आंकड़ा इंदौर और उज्जैन को मिलाकर 2 है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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