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इंदौर भागीरथपुरा दूषित पानी मामला मध्य प्रदेश विधानसभा में गूंजा, स्पीकर ने स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की मांग को नियमों का हवाला देकर किया खारिज

Written by:Ankita Chourdia
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मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विपक्ष ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा की मांग की, जिसे अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने नियमों के विरुद्ध बताते हुए अस्वीकार कर दिया। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सरकार की कार्रवाई का ब्योरा सदन में रखा।
इंदौर भागीरथपुरा दूषित पानी मामला मध्य प्रदेश विधानसभा में गूंजा, स्पीकर ने स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की मांग को नियमों का हवाला देकर किया खारिज

मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन शुक्रवार को इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों का मुद्दा छाया रहा। इस मामले को लेकर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस देखने को मिली। कांग्रेस ने इस गंभीर विषय पर स्थगन प्रस्ताव लाकर चर्चा कराने की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए खारिज कर दिया, जिसके बाद सदन में हंगामा हुआ।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोगों को साफ पानी मुहैया कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “काला पानी की सजा तो सुनी थी, लेकिन यहां तो लोगों को काला पानी पिलाया जा रहा है। सरकार इस पर जवाबदेही से भाग रही है।”

सरकार का पक्ष और विपक्ष के आरोप

विपक्ष के आरोपों पर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी और सरकार ने तत्काल कार्रवाई की। विजयवर्गीय ने कहा, “घटना की जानकारी मिलते ही पीड़ितों के इलाज की व्यवस्था की गई, पानी के नमूनों की जांच कराई गई और नई पाइपलाइन बिछाने का काम भी शुरू कर दिया गया है। जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की गई है।”

उन्होंने यह भी बताया कि भागीरथपुरा 90 साल पुरानी बस्ती है, जहां अशिक्षित लोग रहते हैं। इस वजह से नगर निगम के कर्मचारियों को काम करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, महापौर ने टेंडर जारी किए थे, पर काम समय पर शुरू नहीं हो सका।

स्पीकर ने इस वजह से खारिज किया प्रस्ताव

जब विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के लिए दबाव बनाया तो विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने नियमावली का हवाला दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधानसभा की नियमावली के नियम 55 के उपखंड 5 के अनुसार, किसी ऐसे विषय पर स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से चर्चा नहीं की जा सकती, जिस पर सदन में पहले ही बात हो चुकी हो।

“विधानसभा की नियमावली के नियम 55(5) के अनुसार, स्थगन प्रस्ताव में उस विषय पर चर्चा नहीं होगी, जिस पर सदन में पहले ही चर्चा हो चुकी है।” — नरेंद्र सिंह तोमर, विधानसभा अध्यक्ष

सदन में अन्य मुद्दे और हल्के-फुल्के पल

इस गंभीर बहस के अलावा सदन में कुछ हल्के-फुल्के पल भी देखने को मिले। विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कैलाश विजयवर्गीय पर चुटकी लेते हुए कहा, “आज कैलाश जी बदले-बदले नजर आ रहे हैं।” इस पर विजयवर्गीय ने भी मजाकिया अंदाज में जवाब दिया कि होली का त्योहार आ रहा है और रिश्तों में मिठास बनी रहनी चाहिए। इस बीच, इंदौर के प्रसिद्ध ‘मूर्ख सम्मेलन’ और ‘बजरबट्टू सम्मेलन’ का भी जिक्र हुआ, जिसमें दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर व्यंग्य किया।

वहीं, कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह और बीजेपी विधायक प्रीतम सिंह लोधी के बीच भगवान राम की माता और कौरवों के नाम को लेकर तीखी बहस हुई। इसके अलावा बीजेपी विधायक अजय बिश्नोई ने भोपाल नगर निगम द्वारा एक निजी कंपनी के साथ किए गए बिजली समझौते का मुद्दा भी उठाया। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि दोषियों पर कार्रवाई हुई है और जांच आयोग का भी गठन किया गया है।

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Ankita Chourdia
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