इंदौर में लॉकडाउन के बीच जमानत के लिए कोर्ट में लगी भीड़

इंदौर में लॉकडाउन  के बीच जमानत के लिए कोर्ट में लगी भीड़

इंदौर|आकाश धोलपुरे| देश के हॉटस्पॉट बने इंदौर में कोरोना पॉजिटिव मरीजो की संख्या तकरीबन 953 तक पहुंच गई है। वहीं मरने वालों की संख्या 53 पहुँच चुकी है। इन सबके बीच सड़क से लेकर जेल तक कोरोनावायरस का डर लोगों को सता रहा है। सड़कों पर तो सन्नाटा पसरा है लेकिन जो लोग जेल में बंद है उनके परिजन भी अपनों के लिए बेहद चिंतित हैं। यही वजह है कि जिला कोर्ट की आकस्मिक बेंच के कोर्ट पहुंचते ही जमानत लेने वालों की कोर्ट के बाहर भीड़ लग गई।

छोटे बड़े मामलों में अपनों को जमानत दिलाने के लिए पहुंचे परिजनों ने कोर्ट परिसर में भीड़ लगा दी।। यही नहीं इस दौरान लगी भीड़ हुआ किसी खतरे से कम नहीं लग रही थी। हालांकि जेल में बंद अपनों को सुरक्षित रखने के लिए लोग उन्हें जल्द बाहर निकालना चाहते हैं इसी कड़ी में कोर्ट खुलते ही जमानत के लिए लोगों की होड़ लग गई।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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