कुछ साल पहले तक जब किसी मरीज को ब्रेन स्ट्रोक, लिवर ट्यूमर या खून की नसों में ब्लॉकेज जैसी बीमारी होती थी, तो परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता होती थी बड़ा ऑपरेशन, लंबा अस्पताल खर्च और महीनों की रिकवरी। लेकिन अब चिकित्सा विज्ञान तेजी से बदल रहा है और इलाज का तरीका भी आसान होता जा रहा है।
इसी बदलाव की दिशा को मजबूत करने के लिए इंदौर में आयोजित CVIC Interventional Radiology Summit 2026 का पहला दिन चिकित्सा जगत के लिए बेहद अहम साबित हुआ। देशभर से आए विशेषज्ञों ने उन तकनीकों पर चर्चा की जिनसे बिना बड़े चीरे और ऑपरेशन के गंभीर बीमारियों का इलाज संभव हो रहा है।
इंदौर में CVIC Interventional Radiology Summit 2026 क्यों बना खास?
अरबिंदो परिसर स्थित इरकैड इंडिया में आयोजित इस बड़े मेडिकल समिट में देशभर के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट, न्यूरो विशेषज्ञ और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर शामिल हुए। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य डॉक्टरों को नई तकनीकों से जोड़ना और मरीजों तक कम दर्द वाले आधुनिक इलाज पहुंचाना रहा।
इस दौरान विशेषज्ञों ने लाइव केस डिस्कशन, तकनीकी सत्र और व्यावहारिक प्रशिक्षण के जरिए बताया कि कैसे स्ट्रोक, ब्रेन ब्लॉकेज, लिवर ट्यूमर और किडनी संबंधी जटिल समस्याओं का इलाज अब केवल एक छोटे से कैथेटर या सुई के जरिए संभव हो रहा है।
बिना बड़े ऑपरेशन इलाज का नया रास्ता
इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी आधुनिक चिकित्सा का वह क्षेत्र है जिसमें एक्स-रे, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड जैसी इमेजिंग तकनीक की मदद से शरीर के अंदर की समस्या तक पहुंचा जाता है और वहीं से इलाज किया जाता है।
इस प्रक्रिया में शरीर में बहुत छोटा छेद कर पतली ट्यूब यानी कैथेटर डाला जाता है, जिसके जरिए दवा या उपकरण सीधे समस्या वाली जगह तक पहुंचते हैं। इससे बड़े ऑपरेशन की जरूरत कम हो जाती है।
स्ट्रोक और ब्रेन ब्लॉकेज के इलाज में नई तकनीक की बड़ी भूमिका
समिट के न्यूरो इंटरवेंशन सत्र में ब्रेन से जुड़ी गंभीर बीमारियों के इलाज पर विस्तार से चर्चा हुई। डॉक्टरों ने बताया कि आज स्ट्रोक के मरीजों के लिए समय पर इलाज सबसे ज्यादा जरूरी है। सम्मेलन में जिन तकनीकों पर चर्चा हुई उनमें शामिल हैं एनेयूरिज्म कोइलिंग, मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी, फ्लो डाइवर्टर डिप्लॉयमेंट
कैरोटिड आर्टरी स्टेंटिंग
इन तकनीकों के जरिए दिमाग की नसों में जमा खून का थक्का हटाया जा सकता है और ब्लॉकेज को खोला जा सकता है। इससे लकवे का खतरा कम हो जाता है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है।
लिवर ट्यूमर और कैंसर के इलाज में भी मिल रही नई उम्मीद
विशेषज्ञों ने बताया कि इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी का उपयोग केवल स्ट्रोक तक सीमित नहीं है, बल्कि लिवर ट्यूमर और कुछ प्रकार के कैंसर के इलाज में भी बड़ी भूमिका निभा रहा है। कैथेटर के जरिए दवा सीधे ट्यूमर तक पहुंचाई जाती है, जिससे आसपास के स्वस्थ हिस्सों को कम नुकसान होता है। कई मामलों में मरीज को बड़े ऑपरेशन की जरूरत भी नहीं पड़ती।
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
डॉ. निशांत भार्गव ने कहा कि उनका उद्देश्य मध्य भारत के डॉक्टरों को वही आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है जो बड़े शहरों में मौजूद है। जब डॉक्टर नई तकनीक सीखेंगे, तभी मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। डॉ. आलोक उडिया ने बताया कि अब ओपन सर्जरी हर बीमारी का एकमात्र विकल्प नहीं रही। नई तकनीकों की मदद से ब्लॉकेज हटाना और ट्यूमर का इलाज कम दर्द के साथ संभव है। वहीं डॉ. शैलेश गुप्ता ने कहा कि कई प्रक्रियाओं में मरीज उसी दिन घर लौट सकता है, जिससे मरीज और परिवार दोनों को राहत मिलती है।





