इंदौर जिले के देपालपुर से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। वार्ड क्रमांक छह के हरिजन मोहल्ले में रहने वाले मजदूर परिवार की दो मासूम बेटियों की अचानक तबीयत बिगड़ी और कुछ ही घंटों में दोनों की मौत हो गई। बच्चियों को पहले उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी।
दरअसल, इस घटना के बाद पूरे मोहल्ले में डर और गुस्से का माहौल बन गया है। लोग अब इलाके में फैली गंदगी, टूटी नालियों और दूषित पानी की समस्या को इन मौतों की बड़ी वजह मान रहे हैं। अब पोस्टमार्टम और विसरा जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, ताकि मौत की असली वजह सामने आ सके।
देपालपुर में कैसे बिगड़ी दोनों बहनों की तबीयत?
देपालपुर के हरिजन मोहल्ले में रहने वाले मुकेश चौहान मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर बताया जा रहा है। उनकी दो बेटियां, 8 वर्षीय खुशबू और 6 वर्षीय आरती, अचानक बीमार पड़ गईं। दोनों को तेज उल्टी और दस्त की शिकायत हुई।
परिवार ने पहले घर पर ही इलाज की कोशिश की, लेकिन हालत बिगड़ती चली गई। इसके बाद बच्चियों को तुरंत निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन एक बच्ची की हालत ज्यादा गंभीर होने के कारण उसकी मौत हो गई। दूसरी बच्ची को घर वापस लाया गया, जहां कुछ देर बाद उसने भी दम तोड़ दिया।
स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची मौके पर
घटना की जानकारी मिलते ही जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी, ब्लॉक स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. वंदना केसरी और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने पीड़ित परिवार से बातचीत की और आसपास के लोगों की भी जांच करवाई।
दरअसल, स्वास्थ्य विभाग को आशंका है कि दूषित पानी या खराब भोजन के कारण बच्चियों की तबीयत बिगड़ी हो सकती है। इसी वजह से पूरे इलाके में स्वास्थ्य सर्वे शुरू किया गया। कई घरों से पानी और अन्य नमूने भी लिए गए हैं।
पोस्टमार्टम और विसरा जांच से खुलेगा मौत का राज
जिस बच्ची की मौत अस्पताल में हुई, उसका पोस्टमार्टम करवाया गया है। साथ ही विसरा जांच के लिए भी सैंपल भेजे गए हैं। प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौत की असली वजह क्या थी।
दरअसल, कई बार दूषित पानी, फूड पॉइजनिंग या संक्रमण के कारण भी अचानक ऐसी स्थिति बन जाती है। इसलिए डॉक्टर हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रहे हैं।
दूसरी ओर, इलाके के लोग इसे सीधे गंदगी और खराब सफाई व्यवस्था से जोड़कर देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि बरसात से पहले ही नालियों की हालत बेहद खराब हो चुकी है और जगह-जगह पानी जमा रहता है।
रहवासियों ने लगाए प्रशासन पर गंभीर आरोप
इलाके के लोगों में घटना के बाद काफी नाराजगी दिखाई दी। रहवासियों का कहना है कि अगर समय रहते सफाई व्यवस्था सुधारी जाती, तो शायद मासूम बच्चियों की जान बचाई जा सकती थी।
दरअसल, स्थानीय लोगों ने बताया कि वार्ड में बनी करीब आठ फीट गहरी नालियां बेहद खराब हालत में हैं। कई जगह नालियां टूटी हुई हैं और उनमें गंदा पानी जमा रहता है। लोगों का आरोप है कि पेयजल पाइपलाइन के पास ही गंदगी और नालियों का पानी बहता है, जिससे दूषित पानी घरों तक पहुंच रहा है।
गरीब परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मुकेश चौहान का परिवार बेहद साधारण जीवन जीता है। मजदूरी करके परिवार का गुजारा होता है। ऐसे में दो बेटियों की मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। दरअसल, आसपास के लोग भी इस घटना से सदमे में हैं। मोहल्ले में मातम जैसा माहौल है। लोग बच्चियों को याद कर भावुक हो रहे हैं।
स्थानीय महिलाओं का कहना है कि दोनों बच्चियां बेहद चंचल और मासूम थीं। कोई सोच भी नहीं सकता था कि इतनी जल्दी सब खत्म हो जाएगा। घटना के बाद कई सामाजिक संगठनों ने भी परिवार की मदद की मांग उठाई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मृत बच्चियों के परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की जा रही है।






