इंदौर में हाई-टेक तकनीक से गर्दन की खिसकी हड्डी की सफल सर्जरी, 70 वर्षीय महिला को डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी

इंदौर के इंडेक्स हॉस्पिटल में 70 वर्षीय महिला की एटलैंटोएक्सियल डिसलोकेशन (AAD) के लिए करीब 7 घंटे लंबी जटिल सर्जरी की गई। स्पाइन एंड ऑर्थो सर्जन डॉ. अंकित कायथवाल और टीम ने पोस्टरियर C1-C2 फ्यूजन तकनीक से खिसकी हड्डियों को स्थिर किया। ऑपरेशन के बाद मरीज में दर्द, सुन्नता और कमजोरी के लक्षणों में सुधार दर्ज किया गया है।
इंदौर में हाई-टेक तकनीक से गर्दन की खिसकी हड्डी की सफल सर्जरी, 70 वर्षीय महिला को डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी

इंदौर में एक जटिल स्पाइन सर्जरी के जरिए 70 वर्षीय महिला को गंभीर गर्दन की समस्या से राहत दिलाई गई है। महिला एटलैंटोएक्सियल डिसलोकेशन (AAD) से पीड़ित थीं, जो रीढ़ की ऊपरी कशेरुकाओं C1 और C2 के अपनी सामान्य स्थिति से हट जाने पर बनती है। इंडेक्स हॉस्पिटल में यह ऑपरेशन लगभग 7 घंटे चला।

अस्पताल के स्पाइन एंड ऑर्थो सर्जन डॉ. अंकित कायथवाल और उनकी टीम ने सर्जरी को अंजाम दिया। डॉक्टरों के अनुसार, मरीज की गर्दन की हड्डी दुर्घटना के बाद खिसक गई थी। लगातार दर्द, सुन्नता और हाथ-पैरों में कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे रहे थे, साथ ही चलने में असंतुलन की शिकायत भी थी।

AAD क्यों मानी जाती है गंभीर स्थिति

विशेषज्ञों के मुताबिक AAD केवल गर्दन का दर्द भर नहीं है। C1-C2 के असंतुलन से स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि मरीज में न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी उभरते हैं—जैसे कमजोरी, सुन्नता और संतुलन बिगड़ना। गंभीर मामलों में मस्तिष्क और स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव का जोखिम जीवन के लिए भी खतरा बन सकता है।

डॉ. कायथवाल ने बताया कि मरीज की स्थिति का मूल्यांकन कई जांचों के बाद किया गया। रिपोर्ट्स और क्लिनिकल स्थिति देखने के बाद टीम ने परिजनों को बीमारी की गंभीरता और संभावित जोखिम समझाए। सहमति मिलने पर ऑपरेशन का निर्णय लिया गया।

पोस्टरियर C1-C2 फ्यूजन तकनीक से किया गया ऑपरेशन

सर्जरी के दौरान आधुनिक स्पाइन तकनीक पोस्टरियर C1-C2 फ्यूजन का उपयोग किया गया। इस प्रक्रिया में खिसकी हुई कशेरुकाओं को दोबारा सही एलाइनमेंट में लाकर विशेष स्क्रू और रॉड की मदद से स्थिर किया जाता है। उद्देश्य यह रहता है कि रीढ़ पर बढ़ा दबाव घटे और आगे की न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं की आशंका कम हो।

टीम ने बताया कि ऑपरेशन तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण था और लंबे समय तक सटीक मॉनिटरिंग की जरूरत रही। लगभग सात घंटे की प्रक्रिया के बाद मरीज को पोस्ट-ऑपरेटिव देखरेख में रखा गया, जहां शुरुआती रिकवरी संकेत सकारात्मक रहे।

“आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के कारण जटिल से जटिल बीमारियों का सफल उपचार संभव हो रहा है।” — डॉ. अजय सिंह ठाकुर

ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति में सुधार दर्ज किया गया है। दर्द में कमी आई है और सुन्नता व कमजोरी जैसे लक्षणों में भी राहत बताई गई है। डॉक्टरों के अनुसार, आगे की रिकवरी के लिए नियमित फॉलो-अप और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पुनर्वास जरूरी रहेगा।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि AAD जैसी स्थिति में समय पर पहचान और सही सर्जिकल योजना निर्णायक होती है। देरी होने पर स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव बढ़ सकता है और मरीज की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इंदौर में हुई यह सर्जरी गंभीर स्पाइन समस्याओं के इलाज में उपलब्ध आधुनिक विकल्पों की एक स्पष्ट मिसाल है।

Ankita Chourdia
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