मध्य प्रदेश के इंदौर में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक कर्मचारी को बैंक अधिकारी बनकर फोन किया गया और कहा गया कि उसके खाते का केवाईसी अपडेट नहीं है। अगर तुरंत अपडेट नहीं किया गया तो खाता बंद हो सकता है।
पीड़ित उस समय व्यस्त था, लेकिन ठग ने उसे एक लिंक भेज दिया और कहा कि ऐप इंस्टॉल करते ही केवाईसी अपडेट हो जाएगा। जैसे ही लिंक खोला गया, मोबाइल में ऐप अपने आप इंस्टॉल हो गया और कुछ ही मिनटों में खाते से पैसे निकलने लगे।
फर्जी ऐप इंस्टॉल होते ही खाते से निकल गए लाखों रुपये
पीड़ित विकास शुक्ला कार शोरूम में कंप्यूटर ऑपरेटर का काम करता है और उसकी एक किराना दुकान भी है। उसका बैंक खाता बैंक ऑफ इंडिया में है। ठग ने बैंक कर्मचारी बनकर बात की और खाते की जानकारी अपडेट करने का दबाव बनाया।
मोबाइल में ऑटो अपडेट की सुविधा चालू होने के कारण लिंक खोलते ही फर्जी बैंक ऐप इंस्टॉल हो गया। इसके तुरंत बाद खाते से बार-बार रकम निकलने लगी। कुल मिलाकर करीब 15 ट्रांजेक्शन में लगभग 5 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए गए।
पैसे निकलने का पता चलते ही मचा हड़कंप
लगातार ट्रांजेक्शन के मैसेज आने पर विकास को शक हुआ और उसने तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क किया। इसके बाद साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई गई और क्राइम ब्रांच को भी मामले की जानकारी दी गई। पुलिस अब ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि रकम को ट्रेस कर आरोपियों तक पहुंचा जा सके। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते शिकायत दर्ज होने से कुछ मामलों में रकम वापस भी मिल सकती है।
बढ़ते साइबर अपराध ने बढ़ाई चिंता
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में साइबर अपराध के मामलों में तेजी आई है। ठग अब लोगों को केवाईसी अपडेट, लोन ऑफर, इनाम या खाते के बंद होने की धमकी देकर झांसे में ले रहे हैं। मोबाइल पर भेजे गए लिंक या फर्जी ऐप के जरिए बैंक खाते तक पहुंच बनाई जा रही है और लोग समझ भी नहीं पाते कि उनके साथ ठगी हो चुकी है।





