इंदौर में मेट्रो की खुदाई से घरों में कंपन की शिकायत, GM ने किराए पर लिया फ्लैट, खुद करेंगे निगरानी

मल्हारगंज में मेट्रो खुदाई से कंपन की शिकायत पर जीएम रणवीर सिंह राजपूत ने खुद किराए का फ्लैट लिया है, वे यहां रहकर कंपन की निगरानी करेंगे। यह कदम रहवासियों की लगातार मिल रही शिकायतों के मद्देनजर उठाया गया है।
इंदौर में मेट्रो की खुदाई से घरों में कंपन की शिकायत, GM ने किराए पर लिया फ्लैट, खुद करेंगे निगरानी

इंदौर के मल्हारगंज क्षेत्र में निर्माणाधीन मेट्रो के अंडरग्राउंड स्टेशन की खुदाई के दौरान कंपन की शिकायतों के बाद, मेट्रो प्रबंधन ने स्थिति का वास्तविक आकलन करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। दरअसल कंपनी के महाप्रबंधक (जीएम) रणवीर सिंह राजपूत ने प्रभावित महंत कॉम्प्लेक्स की एक बहुमंजिला इमारत में फ्लैट किराए पर लिया है। वे स्वयं यहां रहकर निर्माण कार्य से होने वाले कंपन और उसके प्रभावों की गहन निगरानी करेंगे। यह कदम रहवासियों की लगातार मिल रही शिकायतों के मद्देनजर उठाया गया है, जहां लोगों ने भूकंप जैसे झटके महसूस होने और घरों में प्लास्टर गिरने की बात कही है।

दरअसल शुक्रवार को सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक चलने वाले बोरिंग और खुदाई कार्य के दौरान, तथा रात में कंक्रीटिंग के काम के बीच, आसपास के रहवासी अचानक घबराकर अपनी इमारतों से बाहर निकल आए। उन्होंने भवनों में तीव्र कंपन महसूस होने की शिकायत की। लोगों का आरोप था कि उन्हें भूकंप जैसे झटके लग रहे हैं, जिससे उनके घरों का प्लास्टर टूटकर गिर रहा है और सामान भी हिलने लगा है। इस हंगामे के बाद, नाराज रहवासियों ने मेट्रो के निर्माण कार्य को तत्काल बंद करवा दिया था।

जीएम रणवीर सिंह राजपूत किराए के फ्लैट में रहेंगे

अब जीएम रणवीर सिंह राजपूत दिन के साथ-साथ विशेष रूप से रात के समय भी निर्माण कार्य के दौरान इस किराए के फ्लैट में मौजूद रहेंगे। उनका उद्देश्य कंपन की तीव्रता का सटीक आकलन करना, भवनों और लोगों पर इसके संभावित प्रभावों को समझना तथा तकनीकी स्तर पर आवश्यक सुधारों की पहचान करना है। यह निगरानी सुनिश्चित करेगी कि निर्माण गतिविधियों से आसपास के वातावरण और संरचनाओं को कोई अनुचित नुकसान न पहुंचे।

रहवासियों ने लगाया यह आरोप

हालांकि, रहवासियों में अभी भी नाराजगी बनी हुई है। उनका कहना है कि उनकी शिकायतों पर अब भी पूरी तरह विश्वास नहीं किया जा रहा है। महीनों से वे कंपन, अत्यधिक शोर और भवनों में आ रही दरारों जैसी गंभीर समस्याओं की शिकायतें कर रहे हैं। इसके बावजूद, अधिकारियों को खुद मौके पर रहकर स्थिति को समझने की आवश्यकता क्यों पड़ी, यह सवाल वे उठा रहे हैं। रहवासियों का मानना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि किसी बड़े हादसे के बाद ही उनकी बातों को गंभीरता से लिया जाएगा।

उधर, मेट्रो प्रबंधन ने इन शिकायतों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। प्रबंधन का कहना है कि रहवासियों की शिकायतों के बाद शनिवार सुबह काम के दौरान सभी पहलुओं की जांच की गई, लेकिन ऐसा कोई बड़ा कंपन या समस्या नहीं पाई गई। प्रबंधन ने यह भी बताया कि किराए पर लिए गए फ्लैट में आवश्यक जांच उपकरण भी रखे गए हैं, ताकि बारिश जैसी मौसमी परिस्थितियों में वे खराब न हों और निरंतर निगरानी की जा सके।

खुदाई के दौरान किसी बड़े कंपन की संभावना से इनकार करते हुए, मेट्रो प्रबंधन ने अपनी ‘रियलिटी चेक’ की बात कही। अधिकारियों ने समझाया कि दरअसल खुदाई के बाद मिट्टी को जेसीबी के पंजे से बाहर निकाला जाता है। इस प्रक्रिया में अक्सर मिट्टी पंजे में चिपकी रह जाती है, जिसे निकालने के लिए पंजे को आगे-पीछे, दाएं-बाएं झटका देना पड़ता है। इस क्रिया से जो आवाज उत्पन्न होती है, वह बहुत कम डेसिबल की होती है, जिसे छोटे पटाखे की आवाज के समान बताया गया।

जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा

प्रबंधन का स्पष्ट दावा है कि नीचे से कंपन होना तकनीकी रूप से संभव ही नहीं है। नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि रहवासियों का एक विशेष समूह शुरू से ही इस परियोजना का विरोध कर रहा है और जानबूझकर भ्रम फैला रहा है। अधिकारी ने यह भी इंगित किया कि लोग तो वहां प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं, जिससे विरोध की बात कमजोर पड़ती है। उन्होंने यह भी बताया कि रहवासियों के शुरुआती विरोध के कारण रात में खुदाई का काम शुरू से ही बंद रखा गया है।

आवाज न करने वाले काम ही रात में किए जाते हैं

रात के समय केवल कंक्रीटिंग का काम किया जाता है, जिसकी आवाज नहीं आती। आवाज न करने वाले काम ही रात में किए जाते हैं। दिन में बोरिंग और खुदाई का काम चलता है। यह व्यवस्था रहवासियों की सुविधा के लिए की गई है, जबकि अन्य शहरों में मेट्रो का काम अक्सर 24 घंटे चलता है। यह दर्शाता है कि मेट्रो प्रबंधन स्थानीय निवासियों की चिंताओं के प्रति संवेदनशील है।

इस बीच, शुक्रवार रात को प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने रहवासियों से मुलाकात की और उन्हें आश्वस्त किया था कि वे मेट्रो अधिकारियों से इस संबंध में बात करेंगे। मंत्री के आश्वासन के बाद शनिवार देर शाम तक काम बंद था। इसी दौरान जानकारी दी गई कि मेट्रो जीएम ने महंत कॉम्प्लेक्स में ही किराए से फ्लैट लिया है। वे यहां दिन और रात में काम के दौरान होने वाले कंपन, बर्तनों के गिरने, दरारों के आने जैसी शिकायतों की ‘रियलिटी चेक’ करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि लोगों के घर या भवन कमजोर न हों या कोई खतरा उत्पन्न न हो। गौरतलब है कि अंडरग्राउंड मेट्रो का काम शुरू होने से पहले मंत्री विजयवर्गीय ने रहवासियों को भरोसा दिलाया था कि निर्माण से किसी मकान या दुकान को नुकसान नहीं पहुंचेगा। उन्होंने दिल्ली के चांदनी चौक की तकनीक का उदाहरण देते हुए कहा था, ‘एक गमला भी नहीं टूटेगा। जहां जो जैसा है, वैसा ही रहेगा।’

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
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कंटेंट राइटर

मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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