इंदौर का एक सयुंक्त परिवार पुलिस और आम जनता की ऐसे कर रहा है सेवा

इंदौर का एक सयुंक्त परिवार पुलिस और आम जनता की ऐसे कर रहा है सेवा

इंदौर।आकाश धौलपुरे।

इंदौर के नवलखा क्षेत्र में रहने वाला मिश्रा परिवार कोरोना संकट के समय शहर के गरीबो के लिए एक मसीहा बनकर खड़ा है। मिश्रा परिवार के 23 सदस्य अपने लाडले सदस्य सुमित मिश्रा के द्वारा बताए गए मार्ग पर सेवा कार्य कर रहे है। बीजेपी के शहर उपाध्यक्ष सुमित मिश्रा ना सिर्फ आम लोगो की मदद करते नजर आ रहे है बल्कि शहर की सुरक्षा में लगे कर्मवीर पुलिसकर्मियों का भी ध्यान रख रहे है। सुमित मिश्रा अकेले ही अब तक 1 हजार से अधिक कर्मवीरों को सेनेटाइजर वितरित कर चुके है साथ ही जिनको मास्क की आवश्यकता पड़ रही है उन्हें मास्क भी मुहैया करवा रहे है। सुमित मिश्रा के सयुंक्त परिवार का हर सदस्य सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अब तक 50 क्विंटल आटा, 25 क्विंटल आलू वितरण कर चुका है साथ ही समूचा परिवार दिन रात निर्धनों की सेवा में लगा हुआ है। बीते 15 दिनों से सुमित मिश्रा और उनका परिवार जरूरतमंदो की सेवा कर रहा है और साथ ही कर्मवीर पुलिस अधिकारियों और जवानों को सेल्युट कर सेनेटाइजर सहित हर जरूरी आवश्यकता उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहा है। लंबे समय से राजनीति से जुड़े रहे सुमित मिश्रा और उनका परिवार संकट के इस काल मे हर वो मुनासिब मदद कर रहा है जो उनकी जद में है। इंदौर का मिश्रा परिवार कोरोना कहर के बीच सेवा कार्य का अनूठा उदाहरण शहर और प्रदेश में पेश कर रहा है ताकि कोरोना संकट को हराया जा सके।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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