इंदौर पुलिस ने मनमानी पर उतरे लोगों से लगवाई उठक-बैठक, धूप में कराई परेड

इंदौर पुलिस ने मनमानी पर उतरे लोगों से लगवाई उठक-बैठक, धूप में कराई परेड

इंदौर/आकाश धोलपुरे

इंदौर में कोरोना पॉजिटिव मरीजो की बढ़ती संख्या के सामने आने के बाद भी शहर के अलग-अलग क्षेत्रो में लोग लॉक डाउन का उल्लंघन करने में अपनी होशियारी समझ रहे हैं। ऐसे में अपनी जान को दांव पर लगाकर अपने परिवार से दूर रह रहे पुलिस फाइटर्स अब ऐसे लोगो को जमकर सबक सीखा रहे है।

बुधवार को इंदौर के परदेशीपुरा थाना पुलिस ने बेवजह घूम रही जनता की जमकर परेड करवा दी जिसके बाद वो लॉक डाउन तो क्या घर के बाहर कदम रखने के पहले भी 100 दफा सोचेंगे। पुलिस ने फालतू घूम रही जनता सड़क पर ही ऐसी सजा दी कि लोगो को भी पता चल गया कि कड़ी धूप में पुलिस कैसे अपने देश की रक्षा करने में जुटी है। पुलिस ने इसके लिये बाकायदा सड़क पर ही कई लोगो को उठक – बैठक लगवा दी, इसके साथ ही लंबी परेड भी करवा दी और थोड़ी एक्सरसाइज भी करवाई। जिसके बाद बेवजह घूमने वाले शौकीनों ने आखिर मान लिया उन्होंने गलती की है और वो ऐसी सजा के हकदार है। साथ ही इन्होने फिर बिना वजह बाहर न निकलने का वादा भी किया।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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