कोरोना संकट के बीच इंदौर पुलिस ने उठाया बड़ा कदम, अब ऐसे देगी समझाइश

कोरोना संकट के बीच इंदौर पुलिस ने उठाया बड़ा कदम, अब ऐसे देगी समझाइश

इंदौर।आकाश धौलपुरे।

कोरोना के खतरे को बहुत हद तक शिक्षित वर्ग समझ चुका है वही समाज के वो लोग जो या तो कम पढ़े लिखे है या फिर अशिक्षित है वो लोग अभी भी पुलिस और प्रशासन के लिए चुनौती बने है। ऐसे लोगो को कोरोना के खतरे को समझाने के लिए इंदौर की विजय नगर पुलिस ने एक अनूठा प्रयास किया है।जिसमे कोरोना के प्रति जागरुकता और सतर्कता का संदेश तो है ही साथ ही पुलिस ने उन लोगो तक भी ये संदेश पहुंचाया है जो अनावश्यक रूप से घर से बाहर घूम रहे है।

दरअसल, पुलिस लगातार गश्त कर लोगो को घरों में रहने के लिए प्रयास कर रही है लेकिन बावजूद इसके लोग पुलिस वाहन निकल जाने के बाद घरों से बाहर किसी मुहाने या ओटलों पर बैठ जाते है जो कोरोना जैसे घातक वायरस को निमंत्रण है। इसी के चलते विजय नगर पुलिस ने क्षेत्र की घनी बस्तियों में अनूठे नुक्कड़ कार्यक्रम को आयोजित किया। जिसमें सोशल डिस्टेंसी का ख्याल रख कोरोना डमी के जरिये के संदेश दिया कि यह वायरस ना जाति देखता है ना धर्म और ना पैसा देखता है ना रुतबा। कोरोना रूपी राक्षस की डमी के साथ पुलिस जहाँ दिन में बीआरटीएस पर लोगो को अवेयर कर रही है वही रात को बस्ती व कालोनियों में। जहां – जहां पुलिस का अभियान चल रहा है वहां- वहां लोगो द्वारा कर्मवीर पुलिस जवानों के लिये तालियां बजाई जा रही है।

डमी के जरिये इंदौर पुलिस द्वारा समझाया जा रहा है कि लोग, घरों से बाहर नहीं निकले। बाहर निकलने पर संक्रमण आपको पकड़ लेगा और आपका स्वास्थ्य खराब होगा जिसके बाद परिवार का स्वास्थ्य खराब होगा और पड़ोसियो का भी स्वास्थ्य खराब होगा इसलिए लोग घरों में रहे,घरों से बाहर ना निकले। इधर, पुलिस का ये अभियान लोगो द्वारा पसंद किया जा रहा है लोग घरों की बालकनी से ही पुलिस के कदम की सराहना कर रहे है।

दौर कोरोना संक्रमण से आम जनता को शिक्षित करने के लिए विजय नगर पुलिस की मुहिम अनावश्यक रूप से घूमने वालेऔर पुलिस के वहां निकल जाने के बाद होटलों पर आकर बैठने वालों को संक्रमण खतरा रूपी दो डमी बनाकर हिदायत दी गई कि घरों से बाहर नहीं निकले बाहर निकलने पर संक्रमण आपको पकड़ लेगा और आपका स्वास्थ्य खराब होगा परिवार का स्वास्थ्य खराब होगा पड़ोसी का स्वास्थ्य खराब होगा समाज का स्वास्थ्य खराब होगा इसलिए घरों में रहे घरों से बाहर ना निकले।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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