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इंदौर को जाम से राहत: LIG से नौलखा तक बनेगा 6.5 KM एलिवेटेड कॉरिडोर, 4 साल बाद फिर पटरी पर आया प्रोजेक्ट

Written by:Bhawna Choubey
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इंदौर के लाखों वाहन चालकों को बड़ी राहत मिलने वाली है। LIG से नौलखा तक बनने वाला 6.5 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर अब आखिरकार शुरू हो रहा है। 350 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से रोज के ट्रैफिक जाम की बड़ी समस्या खत्म होने की उम्मीद है।
इंदौर को जाम से राहत: LIG से नौलखा तक बनेगा 6.5 KM एलिवेटेड कॉरिडोर, 4 साल बाद फिर पटरी पर आया प्रोजेक्ट

इंदौर तेजी से बढ़ता शहर है। हर साल यहां वाहनों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन सड़कों की चौड़ाई और ट्रैफिक व्यवस्था उसी गति से विकसित नहीं हो पाई। इसका नतीजा रोज लगने वाले जाम के रूप में सामने आता है। खासकर LIG चौराहा, पलासिया, भंवरकुआं और नौलखा के आसपास का इलाका लंबे समय से ट्रैफिक दबाव झेल रहा है।

ऐसे में 6.5 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट की खबर शहरवासियों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। कई सालों से रुका यह प्रोजेक्ट अब फिर से शुरू होने जा रहा है। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में रोजाना लगने वाले जाम से छुटकारा मिल सकेगा।

क्या है LIG से नौलखा एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट

LIG स्क्वायर से नौलखा चौराहे तक बनने वाला यह एलिवेटेड कॉरिडोर करीब 6.5 किलोमीटर लंबा होगा। इसे शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक पर तैयार किया जाएगा, जहां दिनभर भारी ट्रैफिक रहता है।

इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 350 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसका मकसद मुख्य सड़क के ऊपर से एक ऊंचा मार्ग तैयार करना है, ताकि लंबी दूरी का ट्रैफिक बिना रुके आगे बढ़ सके और नीचे की सड़कों पर दबाव कम हो।

जब यह एलिवेटेड कॉरिडोर बनकर तैयार होगा, तब वाहन चालकों को कई सिग्नल और जाम से बचते हुए सीधे अपने गंतव्य तक पहुंचने में मदद मिलेगी। इससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।

चार साल तक क्यों रुका रहा एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट

यह सवाल लोगों के मन में सबसे ज्यादा है कि आखिर इतना महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट चार साल तक क्यों अटका रहा। अधिकारियों के अनुसार जमीन से जुड़े तकनीकी मसले, डिजाइन में बदलाव, वित्तीय स्वीकृतियां और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही थी।

शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव के बावजूद यह परियोजना फाइलों में अटकी रही। इस दौरान नागरिकों को रोज जाम की परेशानी झेलनी पड़ी। अब प्रशासन और सरकार ने इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता में रखकर आगे बढ़ाने का फैसला किया है। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि अब प्रोजेक्ट में किसी भी तरह की देरी न हो और तय समय सीमा में काम पूरा किया जाए।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की बैठक में हुआ बड़ा फैसला

शनिवार को इंदौर में विकास परियोजनाओं की समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने की। बैठक में मेयर पुष्यमित्र भार्गव, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में खास तौर पर LIG से नौलखा एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट की स्थिति पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल मिट्टी की जांच का काम चल रहा है, ताकि निर्माण से पहले जमीन की मजबूती का आकलन किया जा सके। मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण के दौरान शहर का ट्रैफिक बाधित नहीं होना चाहिए और काम तय समय सीमा में पूरा होना चाहिए।

15 फरवरी से शुरू होगा नींव का काम

मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अभी तकनीकी परीक्षण और जमीन की जांच का काम चल रहा है। लोक निर्माण विभाग 15 फरवरी से नींव का काम शुरू करेगा। इसके बाद धीरे-धीरे पिलर और ऊपरी संरचना का निर्माण शुरू होगा। शहर के लोगों को उम्मीद है कि अब प्रोजेक्ट तेज गति से आगे बढ़ेगा। यदि निर्माण कार्य तय समय में पूरा हुआ तो आने वाले वर्षों में शहर के ट्रैफिक पर बड़ा सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।

एलिवेटेड कॉरिडोर बनने से आम लोगों को क्या फायदा होगा

इंदौर के लोग रोज ऑफिस, स्कूल, बाजार या दूसरे कामों के लिए इसी मार्ग से गुजरते हैं। जाम के कारण कई बार लोगों को लंबा समय सड़क पर बिताना पड़ता है। एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद लंबी दूरी का ट्रैफिक ऊपर से निकलेगा और नीचे की सड़क स्थानीय ट्रैफिक के लिए खुली रहेगी। इससे जाम की समस्या कम होगी। यात्रा का समय कम होगा, ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण भी घटेगा। आपातकालीन सेवाओं जैसे एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड को भी रास्ता मिलने में आसानी होगी।

निर्माण के दौरान ट्रैफिक कैसे संभाला जाएगा

सबसे बड़ी चिंता यह है कि निर्माण कार्य के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था कैसे संभाली जाएगी। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि निर्माण चरणों में किया जाएगा ताकि पूरे मार्ग पर एक साथ काम न हो। जहां निर्माण होगा, वहां अस्थायी ट्रैफिक डायवर्जन किया जाएगा। कोशिश रहेगी कि आम लोगों को कम से कम परेशानी हो। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रैफिक प्लानिंग सही रही तो निर्माण के दौरान शहर को बड़ी परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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