मेजर हमजा आरिफ को नम आंखों से दी अंतिम विदाई, पत्नी ने सीने से लगाया तिरंगा, जैसलमेर में सैन्य वाहन दुर्घटना में हुए शहीद

मेजर हमजा आरिफ के शहीद होने की खबर ने पूरे इंदौर को भावुक कर दिया। दरअसल जैसलमेर में सैन्य वाहन दुर्घटना में जान गंवाने वाले युवा अधिकारी का पार्थिव शरीर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके घर पहुंचा। बता दें कि एक महीने पहले शादी करने वाले मेजर की अंतिम विदाई में हजारों लोग शामिल हुए।
मेजर हमजा आरिफ को नम आंखों से दी अंतिम विदाई, पत्नी ने सीने से लगाया तिरंगा, जैसलमेर में सैन्य वाहन दुर्घटना में हुए शहीद

जैसलमेर में सैन्य ड्यूटी से लौटते समय हुए सड़क हादसे में शहीद हुए इंदौर के मेजर हमजा आरिफ को रविवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। दरअसल तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर जैसे ही घर पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों ने शामिल होकर देश के वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी।

दरअसल करीब एक महीने पहले जिस परिवार में शादी की खुशियां थीं, वहां अब मातम का माहौल है। अंतिम दर्शन के दौरान सबसे भावुक पल तब आया, जब मेजर हमजा आरिफ की पत्नी ज्योति अरोरा ने कांपते हाथों से तिरंगे को थामा। गार्ड ऑफ ऑनर के बाद सेना के अधिकारियों ने सम्मानपूर्वक वही तिरंगा उन्हें सौंपा, जिसे उन्होंने अपने सीने से लगाकर पति को अंतिम सलाम किया। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया।

कैसे हुआ जैसलमेर में हादसा?

जानकारी के अनुसार यह हादसा गुरुवार देर रात राजस्थान के जैसलमेर जिले के सैन्य क्षेत्र में हुआ। मेजर हमजा आरिफ अपने दो साथी अधिकारियों के साथ ड्यूटी पूरी कर सेना के वाहन से वापस सैन्य स्टेशन लौट रहे थे। इसी दौरान थईयात सैन्य क्षेत्र के पास अचानक एक ऊंट सड़क पर आ गया। तेज रफ्तार वाहन ऊंट से टकराने के बाद अनियंत्रित होकर कई बार पलट गया और काफी दूरी तक घिसटता चला गया। हादसा इतना गंभीर था कि मेजर हमजा आरिफ की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद दो लेफ्टिनेंट अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों का इलाज सैन्य अस्पताल में जारी है। दुर्घटना में ऊंट की भी मौत हो गई। सेना ने हादसे की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचाव के उपाय किए जा सकें। सैन्य मार्गों पर वन्य और आवारा पशुओं की आवाजाही लंबे समय से चुनौती बनी हुई है, जिस पर समय-समय पर सुरक्षा एजेंसियां भी चिंता जताती रही हैं।

पूरे शहर ने दी वीर अधिकारी को श्रद्धांजलि

वहीं रविवार सुबह सैफी नगर में मेजर हमजा आरिफ की जनाजे की नमाज अदा की गई। इसके बाद सेना के वाहन में तिरंगे से ढके पार्थिव शरीर को अंतिम यात्रा के लिए रवाना किया गया। अंतिम यात्रा सैफी नगर से शुरू होकर माणिकबाग पुल, कलेक्टर चौराहा, राजबाड़ा, सदर बाजार होते हुए इमली बाजार स्थित शिया दाऊदी बोहरा कब्रिस्तान पहुंची। रास्ते भर लोग अपने घरों, दुकानों और सड़कों पर खड़े होकर उन्हें अंतिम सलाम करते रहे। राजबाड़ा क्षेत्र में बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने “भारत माता की जय” और “मेजर हमजा आरिफ अमर रहें” के नारे लगाए। कब्रिस्तान में सेना ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया, जिसके बाद धार्मिक परंपराओं के अनुसार उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। अंतिम संस्कार में सेना के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशासनिक प्रतिनिधि, बोहरा समाज के लोग, रिश्तेदार और बड़ी संख्या में शहरवासी मौजूद रहे। परिजनों ने बताया कि 31 वर्षीय मेजर हमजा आरिफ पिछले नौ वर्षों से भारतीय सेना में सेवा दे रहे थे। उनके परिवार में माता-पिता और तीन बहनें हैं। उनके पिता आरआर कैट से सेवानिवृत्त हैं। परिवार का कहना है कि देश सेवा उनके लिए सबसे बड़ा धर्म था और उन्होंने अंतिम सांस तक अपने कर्तव्य का पालन किया।

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Rishabh Namdev

4 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev →
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